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अखिलेश की इस घोषणा से सपाइयों में खुशी, बसपाई असमंजस में  

Fri, 15 Jun 2018 09:03 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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अखिलेश यादव, डिंपल यादव
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कन्नौजः लोकसभा चुनाव में इस बार कन्नौज सीट से अखिलेश ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। अखिलेश के इस फैसले के सामने आने के बाद सपाइयों में खुशी की लहर दौड़ गई। वहीं, बसपाई असमंजस में हैं। चुनाव की तैयारियों में जुटे बसपा नेताओं को झटका लगा है। हालांकि बसपा जिलाध्यक्ष पार्टी हाईकमान के आदेश का इंतजार करने की बात कह रहे हैं लेकिन पार्टी सूत्रों की माने तो इस सीट पर बसपा के कुछ कद्दावर नेता अपनी दावेदारी ठोंक रहे थे। 
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लखनऊ पार्टी कार्यालय में गुरुवार को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पदाधिकारियों की बैठक बुलाई थी। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कन्नौज से भी करीब तीन सौ लोग बैठक में शामिल होने पहुंचेे। यहां कन्नौज के नेताओं से अखिलेश ने विशेष तौर पर बातचीत की और चुनाव की तैयारियों में जुट जाने को कहा।


आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर पदाधिकारियों में जोश भी भरा। इसी के बाद उन्होंने घोषणा कर दी कि वह इस बार लोकसभा चुनाव कन्नौज सीट से लड़ेंगे। कुछ ही देर में अखिलेश के इस फैसले की सूचना जिले के पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंच तो उनमें खुशी की लहर दौड़ गई। 
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राजनीतिक हलकों में अरविंद को मुलायम का शिष्य कहा जाता था

अखिलेश यादव
ये कहना गलत नहीं होगा कि अखिलेश ने कन्नौज से ही राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। वर्ष 1999 में सपा संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंंह यादव ने चुनाव लड़ा। यह चुनाव बेहद प्रतिष्ठापूर्ण रहा। समाजवादी पार्टी का हिस्सा रहे अरविंद प्रताप सिंह ने लोकतांत्रिक पार्टी से चुनाव लड़ा मुलायम सिंह यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा।

राजनीतिक हलकों में अरविंद को मुलायम का शिष्य कहा जाता था। ऐसे में यह चुनाव काफी रोचक हो गया। आखिर में मुलायम ने यह चुनाव सम्मान जनक अंतर से जीत लिया। बाद में मुलायम सिंह यादव ने यह सीट 1999 में छोड़ दी और उपचुनाव में अखिलेश यादव को कन्नौज से चुनाव लड़ाया। राजनीतिक क्षेत्र में अखिलेश यादव की इंट्री इसी सीट से हुई और वह चुनाव जीतकर सबसे कम उम्र के सांसद बने।
 

कन्नौज संसदीय क्षेत्र से अखिलेश यादव तीन बार लगातार सांसद चुने गए और उनके जीत का अंतर हर बार बढ़ता गया। वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी की प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने पर अखिलेश यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सीएम बनने के बाद उनको यह सीट छोड़नी पड़ी। पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की मांग पर डिंपल यादव को कन्नौज से चुनाव लड़ाया गया और वह निर्विरोध चुनाव जीती।

 

डिंपल ने निर्विरोध चुनाव जीतकर रचा था इतिहास

अखिलेश यादव
वर्ष 2014 में हुए सामान्य चुनाव में मोदी लहर होने के बावजूद सपा परिवार इस परंपरागत सीट को बचाने में कामयाब रहा। गुरुवार को सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की घोषणा से सपाइयों में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वह इस बार कन्नौज से चुनाव लड़कर इतिहास रचेंगे।


उधर, सपा-बसपा के बीच हुए गठबंधन से पिछले कई वर्षों से बसपा से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेताओं को झटका लगा है। हालांकि कांग्रेस ने वर्ष 2014 के चुनाव में भी मौखिक सहमति के चलते कोई भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारा था।



संसदीय क्षेत्र से सांसद डिंपल यादव ने वर्ष 2012 में हुए उपचुनाव में निर्विरोध चुनाव जीतकर इतिहास रचा था। वह प्रदेश की पहली ऐसी महिला सांसद बनीं जिन्होंने निर्विरोध चुनाव जीता। इससे पहले कोई निर्विरोध चुनाव जीतकर संसद नहीं पहुंचा था। 


 
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प्रदेश के डिप्टी सीएम की इज्जत रहेगी दांव पर

अखिलेश यादव
प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश चंद्र शर्मा ने बीते माह हसेरन में कहा था कि सपा सुप्रीमो कन्नौज से चुनाव लड़ने का मूड बना रहे हैं। यदि वह चुनाव लड़े तो भाजपा प्रत्याशी उनको बुरी तरह हराएगा। लगता है कि सपा सुप्रीमो ने उनके इस चैलेंज को कबूल करते हुए ही गुरुवार को कन्नौज से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।


पार्टी के निर्देश पर काम करेगा जिला संगठन - बसपा जिलाध्यक्ष
बसपा जिलाध्यक्ष संजीव दोहरे ने बताया कि संगठन में केवल बूथ कमेटियों को मजबूत करने का काम चल रहा था। लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए फिलहाल किसी कार्यकर्ता ने इच्छा नहीं जताई थी। अब जब सपा-बसपा का गठबंधन हो गया है। ऐसी सूरत में जिला संगठन पार्टी सुप्रीमो के निर्देश पर अगला कदम उठाएगा।
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