वर्ष 2000 के उपचुनाव से सियासी आगाज करने वाले अखिलेश यादव ने उसके बाद लगातार तीन चुनाव जीता। वर्ष 2004 और 2009 के चुनाव में भी यहां से कामयाबी मिली। वर्ष 2012 में यहां से सांसद रहते हुए ही उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
सूबे के सबसे युवा मुख्यमंत्री रह चुके सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपनी सियासी पारी का आगाज इत्रनगरी कन्नौज से किया था। खुद मुलायम सिंह यादव ने उन्हें यहां अपनी सियासी विरासत सौंपी थी। दो जगह से एक साथ निर्वाचित होने के बाद उन्होंने कन्नौज से इस्तीफा देकर यहां खाली हुई सीट पर पुत्र अखिलेश यादव को मैदान में उतारा था। पहले ही चुनाव में रिकॉर्ड वोट से जीतने के बाद अलिखेश यादव ने यहां से लगातार तीन चुनाव जीते।
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सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने 1998 का लोकसभा चुनाव संभल से जीता था। अगले ही वर्ष 1999 में हुए चुनाव में उन्होंने संभल के साथ ही कन्नौज से भी चुनाव लड़ा था। दोनों सीट से जीतने के बाद उन्हें किसी एक सीट से इस्तीफा देना था। कन्नौज के कार्यकर्ताओं ने यहां से इस्तीफा देकर खाली सीट पर पुत्र अखिलेश यादव को मैदान में उतारने की सलाह दी। मुलायम सिंह को यह बात जंच गई। उन्होंने वैसा ही किया। इस तरह वर्ष 2000 में उपचुनाव का ऐलान हुआ तो अखिलेश यादव पहली बार सियासत के मैदान में उतरे।
अखिलेश यादव के चुनाव संयोजक रहे ब्रजेंद्र नारायण सक्सेना उर्फ गुड्डू सक्सेना बताते हैं कि उस समय अखिलेश यावद की उम्र करीब 27 वर्ष थी। शर्मीले मिजाज के होने के बावजूद अखिलेश ने उपचुनाव में कामयाबी के लिए उन्होंने कन्नौज में ही डेरा डाल दिया। लोकसभा क्षेत्र के चप्पे-चप्पे को मथ डाला। उनकी मेहनत रंग लाई और बसपा के अकबर अहमद डंपी से मिली कड़ी टक्कर के बावजूद पहला चुनाव रिकॉर्ड वोटों से जीतने में कामयाबी हासिल कर ली।
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सांसद रहते हुए बने मुख्यमंत्री
वर्ष 2000 के उपचुनाव से सियासी आगाज करने वाले अखिलेश यादव ने उसके बाद लगातार तीन चुनाव जीता। वर्ष 2004 और 2009 के चुनाव में भी यहां से कामयाबी मिली। वर्ष 2012 में यहां से सांसद रहते हुए ही उन्होंने सूबे के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
आजमगढ़ और मैनपुरी से भी बने सांसद-विधायक
वर्ष 2012 से 2017 तक मुख्यमंत्री रहने के दौरान अखिलेश यादव विधान परिषद के सदस्य रहे। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आजमगढ़ का रुख किया और सांसद बने। पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से मैदान में थीं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव जीता और आजमगढ़ के सांसद पद से इस्तीफा दिया। इस तरह वह अब तक तीन जिलों की नुमाइंदगी कर चुके हैं।
फिर कन्नौज से लड़ने की चर्चा
अब चूंकि 2024 के चुनाव का बिगुल बज चुका है। भाजपा से मोर्चा लेने के लिए अखिलेश यादव पर पार्टी की निगाह है। चर्चा है कि 2019 में भाजपा के हाथों हारी हुई कन्नौज की सीट को फिर से हासिल करने के लिए खुद अखिलेश यादव यहां से ताल ठोकेंगे। हालांकि अब तक इसका एलान नहीं हुआ है, लेकिन कार्यकर्ताओं के बीच यही चर्चा है कि उनका इस सीट से चुनाव लड़ना तय है।
कन्नौज में अखिलेश यादव का प्रदर्शन
- 2000 के उपचुनाव में पहली बार कन्नौज से 58725 वोट से जीते
- 2004 के आम चुनाव में दूसरी बार कन्नौज से 307373 वोट से जीते
- 2009 के आम चुनाव में तीसरी बार कन्नौज से 115864 वोट से जीते