पीएनजी उपभोक्ताओं पर सिलेंडर रोक के बाद हालात और बिगड़े
नौ माह से नहीं भराया था सिलेंडर उनके कनेक्शन हुए डीएक्टिवेट
बुकिंग तीन गुना बढ़ी, गैस के लिए लंबी कतारें
माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर।
अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद देश में गहराते गैस संकट का असर अब सीधे शहर की रसोई तक पहुंच गया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि सरकार ने एक झटके में कानपुर के करीब 1.50 लाख एलपीजी उपभोक्ताओं के कनेक्शन डीएक्टिवेट कर दिए हैं। ये वे उपभोक्ता हैं जिन्होंने पिछले नौ महीने से अधिक समय से सिलेंडर नहीं लिया था। अब इन कनेक्शनों को दोबारा चालू कराने के लिए ईकेवाईसी अनिवार्य कर दी है। अचानक लिए गए इस फैसले से शहर में हड़कंप मच गया है और हजारों लोग एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
कानपुर में भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल की एजेंसियों को मिलाकर करीब 11 लाख से अधिक एलपीजी उपभोक्ता हैं। अचानक बढ़ी मांग और सीमित सप्लाई के कारण एजेंसियों के सामने समय पर सिलेंडर उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने शनिवार रात एक और सख्त कदम उठाते हुए पीएनजी कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलेंडर देने पर रोक लगा दी है। इससे शहर के एक लाख से अधिक उपभोक्ताओ को झटका लगा है। इससे प्रदेश स्तर पर कार्रवाई करते हुए करीब 2.3 करोड़ एलपीजी कनेक्शन अस्थायी रूप से डीएक्टिवेट किए गए हैं। गैस कंपनियों के अधिकारीयों का कहना है कि जिन उपभोक्ताओं ने लंबे समय से सिलेंडर नहीं लिया है, उन्हें दोबारा कनेक्शन चालू कराने के लिए आधार आधारित ईकेवाईसी करानी होगी। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
वंही दूसरी तरफ एक सप्ताह से कामर्शियल सिलेंडर की बिक्री पर रोक लगने से होटल, ढाबे, रेहड़ी-पटरी दुकानदार और रेस्टोरेंट संचालक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। कई कारोबारियों का कहना है कि पीएनजी की आपूर्ति पहले से ही सीमित है और एलपीजी पर रोक लगने से उनका कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
तीन गुना बढ़ा बुकिंग का लोड
गैस संकट की खबर फैलते ही बीते एक सप्ताह से शहर की कई गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से लंबी कतारें लगती है । लोग सिलेंडर बुकिंग और कनेक्शन चालू कराने के लिए एजेंसियों पर उमडे रहते है । कई जगहों पर भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति बनती है। एजेंसियों के अनुसार सामान्य दिनों की तुलना में बुकिंग तीन गुना तक पहुंच गई है, जिससे वितरण व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ गया है। ज़ब की समान्यता 15हजार सिलेंडर एक दिन में सप्लाई होता है। इन दिनों डिलेवरी का अकड़ा 25हज़ार के पार पहुंच गया है।