कानपुर। डॉ. आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर दिव्यांगजन के छात्रों को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने बैंक के लेनदेन को सुरक्षित करने का समाधान प्रस्तुत कर संस्थान का नाम रोशन किया है। यह समाधान राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता फिनस्पार्क 2026 में प्रस्तुत किया गया था। टीम को एक लाख की पुरस्कार राशि भी मिली।
प्रतियोगिता में देशभर से करीब 10,000 पंजीकरण हुए थे, जिनमें लगभग 1,000 टीमों ने भाग लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद केवल शीर्ष 20 टीमों को फाइनल राउंड के लिए चुना गया। इसका ग्रैंड फिनाले सीओपीई टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, पुणे में हुआ। टीम का नेतृत्व अंतिम वर्ष के केमिकल इंजीनियरिंग के छात्र पीयूष साहू ने किया।
टीम में विष्णुकांत राय (तृतीय वर्ष, कंप्यूटर साइंस), अर्पित सोलंकी (अंतिम वर्ष, कंप्यूटर साइंस) और रजत कुमार (तृतीय वर्ष, कंप्यूटर साइंस) शामिल रहे। पीयूष साहू ने कहा कि पहले राउंड में टीम को एआई डि्रवन कोरिलेशन ऑफ साइबर सिक्योरिटी टेलीमेट्री एंड ट्रांजेक्शनल बिहेवियर प्राब्लम स्टेटमेंट दिया गया। कई दिनों तक समस्या को समझने के साथ सेंटिलक्यू एआई नाम का समाधान तैयार किया। यह प्लेटफार्म बैंक के ट्रांजेक्शन और साइबर सिक्योरिटी इवेंट को एक ही डैशबोर्ड पर जोड़कर रिस्क स्कोर के आधार पर संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करता है।
इससे बैंक में होने वाले साइबर हमलों का आसानी से पता लगाया जा सकता है। फाइनल राउंड में इसका लाइव डेमो दिया गया। टीम ने समाधान, तकनीकी कौशल और प्रभावशाली प्रस्तुति से निर्णायकों को प्रभावित किया। यह उपलब्धि संस्थान के छात्रों की प्रतिभा, नवाचार क्षमता और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की योग्यता का प्रमाण मानी जा रही है। संस्थान की निदेशक डॉ. रचना अस्थाना ने टीम को बधाई दी है।