वाइस एयर मार्शल प्रमोद कुमार श्रीवास्तव
पाकिस्तान और चीन से तनातनी के माहौल के बाद वायुसेना ने देश भर में टैक्सी ट्रूप विकसित करने की योजना बनाई है। वायुसेना की भाषा में संर्कीण, छोटी और कम संसाधन वाली हवाई पट्टियों को टैक्सी ट्रूप कहा जाता है। उन्नाव में वायु सेना के वाइस एयर मार्शल प्रमोद कुमार श्रीवास्तव ने अनौपचारिक बातचीत में बताया कि बिहार, झारखंड के साथ ही उत्तर प्रदेश में भविष्य में बनने वाले एक्सप्रेस वे या राष्ट्रीय राजमार्गों में ऐसी हवाई पट्टियां बनाई जाएंगी। इन हवाई पट्टियों का इस्तेमाल आपातकालीन स्थिति में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस तरह की हवाई पट्टियों के कई फायदे होते हैं। एक तो दैवी आपदा भूकंप, बाढ़ या अन्य तरह की घटना के समय उपलब्ध संसाधनों में ही हवाई जहाज उतारे जा सकते हैं। दूसरा फायदा ये है कि किसी आपातकालीन स्थिति में वायु सेना के जंगी जहाजों को उड़ने का मौका न मिले तो उनके पास विकल्प के तौर पर उनकी पहुंच की सीमा में छोटी हवाई पट्टियां उपलब्ध रहें। इस वजह से वायु सेना अपने निर्धारित रनवे के अलावा भी वैकल्पिक रनवे तैयार करने पर जोर दे रही है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे से किस सीमा पर वायुसेना तत्काल कार्रवाई कर सकती है, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि कार्रवाई से ज्यादा महत्वपूर्ण हवाई पट्टी की उपलब्धता है। युद्ध की स्थिति में दुश्मन की पहली कोशिश रनवे नष्ट करने की होती है। रनवे न होने की स्थिति में हाईवे पर बनीं इन हवाई पट्टियों को फाइटर और कारगो एयरक्राफ्ट की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।