अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत इंटेसिव ब्लाकों में गठित महिला स्वयं सहायता समूहों की फीडिंग में धीमी प्रगति पर शासन ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। बांदा जनपद प्रदेश के न्यूनतम प्रगति वाले जिलों की श्रेणी में शामिल हो गया है। सीडीओ ने अधिकारियों को सप्ताह भर का अल्टीमेटम दिया है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन निदेशक डॉ.सरोज कुमार ने मुख्य विकास अधिकारी रामकुमार सिंह को इस बाबत पत्र भेजा है। पत्र के मुताबिक सभी इंटेसिव जनपदों के 78 ब्लाकों में महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। इन समूहों का टीबीएसडीएस (ट्रांक्जक्शन वेस्ड एसएचजी डिजिटल एकाउंटिंग सिस्टम) पर फीडिंग किया जाना है। इस बाबत 20 सितंबर को निर्देश भी दिए गए थे।
जिला व ब्लाक स्तर पर फीडिंग के संबंध जानकारी के लिए प्रशिक्षण भी हो चुके हैं। इसमें आ रही समस्याओं का शासन स्तर पर निस्तारण भी किया जा चुका है। लेकिन खेद है कि जिले में अभी भी प्रगति माह 10 समूहों से भी कम है। ऐसे में जिला प्रदेश के न्यूनतम प्रगति वाले जनपदों की श्रेणी में आ रहा है। उन्होंने सप्ताह भर में शत-प्रतिशत महिला समूहों की टीबीएसडीएस फीडिंग करने के निर्देश सीडीओ को दिए हैं।
उधर, मुख्य विकास अधिकारी ने एनआरएलएम के अधिकारियों व कर्मचारियों को फीडिंग में लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। साथ ही सप्ताह भर में शत-प्रतिशत फीडिंग न कराने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है। गौरतलब है कि जनपद में बड़ोखर व नरैनी ब्लाक में 461 महिला स्वयं सहायता समूह गठित हैं। इनकी सक्रियता व हकीकत जानने और योजना का पैसा समूहों को सीधे भेजे जाने की प्रक्रिया के तहत फीडिंग का कार्य शासन युद्ध स्तर पर करा रहा है।