कानपुर। मर्चेंट्स चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की इनफार्मेशन एंड टेक्नोलॉजी कमेटी की ओर से शनिवार को कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें कहा गया कि एआई उन कार्यों में अधिक प्रभावी दिखाई देता है जहां कार्य स्पष्ट हो, पर्याप्त डाटा उपलब्ध हो और निर्णय दोहराव वाले हों। वहीं, जटिल, संदर्भ आधारित और उच्च जिम्मेदारी वाले कार्यों में एआई अभी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।
मुख्य वक्ता, आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर विमल कुमार ने कहा कि कुछ लोग एआई को अगली औद्योगिक क्रांति मान रहे हैं। उन्होंने एआई को एक जनरल-पर्पस टेक्नोलॉजी (जीपीटी) के रूप में देखने पर ज़ोर दिया। ठीक उसी तरह जैसे कभी बिजली और कंप्यूटर को देखा गया था।
एआई कस्टमर सपोर्ट, कोडिंग के कुछ हिस्से तथा कंटेंट ड्राफ्टिंग में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिम्मेदारी वाले कार्यों में उपयोग की गति धीमी इसलिए है क्योंकि फर्मों को केवल नए टूल अपनाने नहीं, बल्कि पूरे वर्कफ़्लो और संगठनात्मक प्रक्रियाओं में बदलाव करने पड़ते हैं। इस मौके पर कमलेश जैन, अतुल कनोडिया, अनिल के सक्सेना, मनु अग्रवाल, मुकुल टंडन, सुधींद्र जैन, राहुल चंद्रा, अतुल अग्रवाल, अमित पांडेय, छवि जैन, सुनील त्रिवेदी आदि थे।