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अहोई अष्टमी आज: महिलाएं अपनाएं ये पूजन विधि, सौभाग्य में बदल जाएगा संतान का दुर्भाग्य

Wed, 31 Oct 2018 09:59 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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इस बार अहोई अष्टमी 31 अक्तूबर यानी आज है। इस दिन निर्जला व्रत रखकर महिलाएं संतान की लिए मंगल कामना करती हैं। अहोई अष्टमी पर विधि-विधान से किया गया पूजन विशेष फलदायी होता है। 
 
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आचार्य दीपक पांडेय ने बताया कि अहोई अष्टमी का व्रत करवाचौथ के चार दिन बाद और दीपावली से आठ दिन पहले रखा जाता है।
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हिंदू कलेंडर के अनुसार यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाता है। बुधवार को सुबह 11:09 बजे से अष्टमी शुरू होगी और एक नवंबर की सुबह 9:10 बजे खत्म होगी। इस दिन महिलाएं संतान की मंगल कामना के लिए पूजन कर व्रत भी रखती हैं। 

ये है व्रत विधि

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सुबह उठकर स्नान करने और पूजा के समय ही पुत्र की लंबी अायु और सुखमय जीवन के लिए अहोई अष्टमी व्रत का संकल्प लिया जाता है। अनहोनी से बचाने वाली माता देवी पार्वती हैं इसलिए इस व्रत में माता पर्वती की पूजा की जाती है। अहोई माता की पूजा के लिए गेरू से दीवार पर अहोई माता के चित्र के साथ ही स्याहु और उसके सात पुत्रों की तस्वीर भी बनाई जाती है।
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माता जी के सामने चावल की कटोरी,  मूली, सिंघाड़ा अादि रखकर कहानी कही और सुनी जाती है। सुबह पूजा करते समय लोटे में पानी और उसके ऊपर करवे में पानी रखते हैं। दिवाली के दिन इस करवे का पानी पूरे घर में भी छिड़का जाता है। लोटे के पानी से शाम को चावल के साथ तारों को अर्घ्य दिया जाता है। अहोई पूजा में चांदी की अहोई बनाने का विधान है, जिसे स्याहु कहते हैं। स्याहु की पूजा रोली, अक्षत, दूध व भात से की जाती है। 
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