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प्रधानमंत्री बोले, पढ़े-लिखे लोग खेती करेंगे तो बदलेगी तस्वीर

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उन्नाव। जैविक विधि से खेती करने वाले बीटीसी और टीईटी पास किसान अरविंद कुमार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काफी प्रभावित हुए। उन्होंने जैविक खेती की शुरुआत और अब तक उत्पादित की गई फसलों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अन्य किसानों को भी जैविक खेती से जोड़ने की अपील की।
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सिकंदरपुर सरोसी ब्लॉक के रौतापुर गांव निवासी 25 वर्षीय अरविंद कुमार जैविक विधि से खेती कर रहे हैं। काला नमक प्रजाति का चावल, गेहूं, तिल, मूंगफली, खरबूजा, तरबूज की फसलों का उत्पादन करते हैं। नमामि गंगे जैविक कृषक नाम का समूह गठित करके उन्होंने किसानों को जोड़ा। अरविंद को शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वर्चुअल बातचीत का मौका मिला। एनआईसी में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये प्रधानमंत्री ने सबसे पहले अरविंद से बात की। जैविक खेती की शुरुआत के बारे में पूछा। अरविंद ने बताया कि डेढ़ साल पहले गंगा यात्रा आई थी। इसमें गंगा के किनारे के गांवों में जैविक खेती को बढ़ावा देने की जानकारी दी गई थी। उन्होंने कृषि विभाग से संपर्क किया तो गुजरात में चल रहे कार्यक्रम में प्रतिभाग करने का मौका मिला। इससे जैविक खेती करने की प्रेरणा मिली। अधिकारियों से संपर्क करके जैविक खेती की विधि जानी और काम शुरू किया। प्रधानमंत्री ने अरविंद से अब तक जैविक विधि से तैयार की गई फसलों की जानकारी ली। अरविंद ने बताया कि वह चावल, गेहूं जैसी परंपरागत खेती के अलावा तिल, मूंगफली, खरबूजा, पपीता व तरबूज की फसलें उगाते हैं।
अरविंद द्वारा नमामि गंगे जैविक कृषक समूह गठित कर किसानों को जोड़ने की जानकारी होने पर पीएम ने तारीफ की। प्रधानमंत्री ने अरविंद की कार्यशैली को सराहा और कहा कि यह सुखद है कि अब खेती में नौजवान और पढ़े लिखे लोग आगे आ रहे हैं। वैज्ञानिक विधि से खेती करके मुनाफा तो कमा ही रहे हैं, अन्य के लिए नजीर भी बन रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अरविंद से ज्यादा से ज्यादा किसानों को जैविक विधि से खेती के लिए प्रेरित करने को कहा। इस दौरान एनआईसी में उप कृषि निदेशक डॉ. नंदकिशोर व जिला सूचना विज्ञान अधिकारी एसके निगम मौजूद रहे।
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प्रधानमंत्री ने अरविंद से जैविक खाद तैयार करने की विधि पूछी। अरविंद ने बताया कि गाय के गोबर, गोमूत्र, बेसन, गुड़ और बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी को मिश्रित करके खाद तैयार करते हैं। इसे फसलों में डालते हैं। जैविक खाद के बाद अन्य किसी प्रकार की रासायनिक उर्वरक या कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते हैं। इसके प्रयोग से फसल पूरी तरह से स्वास्थ्यवर्धक होती है।
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