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लॉकडाउन में काम-धंधा छूटा तो ऑनलाइन बेचने लगे कद्दू, बन गए ‘लखपति’

Fri, 16 Oct 2020 02:35 AM IST
कानपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
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अपनी फसल दिखाते कानपुर देहात जिले के किसान अमित पाल। - फोटो : अमर उजाला
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राजपुर (कानपुर देहात)। कोरोना काल में अधिकांश उद्योग धंधे चौपट हो गए और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार से भी हाथ धोना पड़ा। ऐसे में राजपुर क्षेत्र के बकसौधी गांव निवासी युवा किसान अमित पाल ने आय बढ़ाने का नायाब तरीका निकाला। उन्होंने दस बीघे में कद्दू की खेती की। जिसमें छह सौ क्विंटल कद्दू उगाया। स्थानीय बाजार में मंदी के चलते उन्होंने ऑनलाइन बिक्री का सहारा लिया। पश्चिम बंगाल के कोलकाता के एक व्यापारी ने उनसे पूरे खेत का कद्दू खरीदने की डिमांड कर दी। वह कद्दू सीधे कोलकाता भेजकर बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं। किसान ने बताया कि उन्हें करीब चार लाख रुपये का मुनाफा हुआ है।
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राजपुर ब्लाक के बीहड़ पट्टी में बसे बकसौधी गांव निवासी अमित पाल ने इंटर पास करने के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। कुछ दिन भटकने के बाद अमित ने खेती करने का मन बनाया। शुरुआती दौर में युवा किसान ने परंपरागत खेती छोड़ छह बीघे में कद्दू की खेती की। इसमें महज तीन माह में डेढ़ लाख रुपये का मुनाफा होने पर खेती के प्रति रुचि और बढ़ गई। किसान ने पूरे दस बीघे में कद्दू की फसल की। तीन माह बाद उपज तैयार हो गई। कोरोना के दौरान बाजार में आई मंदी के चलते किसान के मन में कद्दू बेचने की चिंता बढ़ गई। बाद में उसने कद्दू बेचने के लिए उपज की जानकारी ऑनलाइन साझा कर दी।

कोलकाता के एक व्यापारी चुन्नू लाल ने किसान से संपर्क किया। इसके बाद व्यापारी ने किसान की पूरी उपज खरीद ली। अमित ने बताया कि दस बीघे में करीब छह सौ क्विंटल कद्दू हुआ था। कोलकाता के एक व्यापारी ने 960 रुपये प्रति क्विंटल में खरीद लिया। वह मुनाफे वाली कद्दू की खेती व उसकी बिक्री करने के आधुनिक तरीके के बारे में अन्य किसानों को जागरूक कर रहे हैं।
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परंपरागत खेती को छोड़ उगाया कद्दू
युवा किसान अमित ने बताया कि उसके पास कुल दस बीघा खेत हैं। पहले पिता परंपरागत खेती करते थे। बीहड़ इलाका होने से खाने भर के लिए उपज हो जाती थी। अमित ने खेती का काम खुद संभाला। वह परंपरागत से हट कर कद्दू की खेती करने लगे। उन्हें लगातार मुनाफा हो रहा है। खेती में उनके पिता कुंवर पाल मदद करते हैं।

कम लागत में होता ज्यादा मुनाफा
राजपुर।
बीहड़ पट्टी के बकसौधी गांव के युवा किसान अमित कुमार पाल ने बताया कि अन्य फसलों के सापेक्ष कद्दू की फसल में कम लागत आती है। इस फसल में हर सप्ताह सिंचाई की जरूरत होती है। किसान ने बताया कि बुआई से लेकर उपज तैयार होने तक अधिकतम तीन-चार बार निराई-गुड़ाई करनी पड़ती है। फसल महज तीन माह में तैयार हो जाती है। प्रति बीघा करीब 60 क्विंटल औसतन उत्पादन होता है। (शफात अनवर फातमी, संवाद)
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