फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कन्नौज: ढाई साल बाद हत्यारोपी फौजी को पुलिस ने दबोचा, फौजी के स्थान पर छोटा भाई है जेल में

Tue, 03 Mar 2020 12:26 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज
विज्ञापन
पुलिस हिरासत में हत्यारोपी अंकित - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
कन्नौज जिले के विशुनगढ़ में ढाई साल पहले हुई हत्या के मामले का आरोपी फौज में नौकरी करता रहा। उसकी जगह छोटा भाई जेल की हवा खाने को मजबूर हो गया। मामला तब खुला जब पुलिस ने छुट्टी पर आए आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की।
विज्ञापन


प्रभारी निरीक्षक इंद्रपाल सरोज ने उपनिरीक्षक रज्जनलाल व सिपाहियों के साथ मुखबिर की सूचना पर ग्राम रुद्रपुर जमामर्दपुर निवासी अंकित पुत्र अमर सिंह को गिरफ्तार किया है। अंकित उत्तराखंड में फौज के रेजीडेंस सेंटर रानीखेत में सिपाही के पद पर तैनात है।

 

पुलिस हिरासत में अंकित ने बताया कि जुलाई 2018 में वह फौज से छुट्टी पर आया था। 22 जुलाई को गांव के ही धर्मपाल पुत्र बालादीन के घर डीजे पर डांस करने को लेकर विवाद हो गया था। उसने अपने बाबा जयवीर सिंह पुत्र स्व. जौहरी की लाइसेंसी बंदूक से फायर कर दिया था। गोली लगने से रामपाल पुत्र वेदप्रकाश की मौत हो गई थी। कुछ लोग घायल हो गए थे।

हत्या के बाद वह बंदूक को वहीं पर छोड़कर भाग गया था। हत्या के मामले में उसके भाई आदित्य ने उसके स्थान पर आत्मसमर्पण किया था। वह कन्नौज जेल में बंद है। अंकित ने बताया कि उम्र अधिक होने के कारण उसने अपने भाई आदित्य यादव की सहमति से उसके शैक्षिक अभिलेखों में हेरफेर कर वर्ष 2017 में फौज में नौकरी पाई थी। पुलिस ने अंकित को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। यहां से उसे जेल भेज दिया गया।
विज्ञापन

एसपी व एडीजी को हाईकोर्ट ने किया तलब
अंकित फौजी की गोली का शिकार हुए रामपाल सिंह के परिजनों ने पुलिस की जांच पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए हाईकोर्ट लखनऊ में याचिका दायर की थी। आरोप है कि पुलिस ने जांच में खेलकर मुख्य आरोपी की जगह उसके छोटे भाई को जेल भेज दिया। सुनवाई के दौरान मामला गंभीर देख हाईकोर्ट ने पांच मार्च को एसपी अमरेंद्र प्रसाद व एडीजी को तलब किया है। हाईकोर्ट के तल्ख तेवरों को देखते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी अंकित फौजी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद हत्या का खुलासा हो सका।

कागजों में हेरफेर से आदित्य गया था जेल
शैक्षिक अभिलेखों में हेरफेर होने के कारण अंकित के स्थान पर आदित्य को जेल जाना पड़ा था। अंकित अपने छोटे भाई आदित्य के शैक्षिक अभिलेखों से नौकरी रहा था। हत्या के मामले में जेल और नौकरी जाने के डर से आदित्य ने कन्नौज न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें