चालकों को वेतन में आपत्ति थी
जब पूरा वेतन व प्रोत्साहन राशि, मांगी तो टरकाने लगे। इससे आक्रोशित होकर हड़ताल की है। इस दौरान चालक लक्ष्मीकांत यादव, श्याम बहादुर, धर्मेंद्र सिंह सहित 225 से ज्यादा चालक व परिचालक हड़ताल पर रहे। तीर्थांकर कंपनी के सुपरवाइजर शिवम भदौरिया ने बताया कि चालकों को वेतन में आपत्ति थी। प्रबंधन ने वार्ता कर समाधान का आश्वासन दिया है।
एक भी बस डिपो से नहीं निकली
पूरे दिन ई-बसों का संचालन ठप रहने से एक भी बस डिपो से नहीं निकली। यात्रियों को टेंपो, ऑटो, ई-रिक्शा व सीएनजी सिटी बसों का सहारा लेना पड़ा। रामादेवी से आईआईटी रूट पर 21, बिंदकी रूट पर 16, घाटमपुर रूट पर 40, बिल्हौर में 16 सहित अन्य रूटों पर दो से चार बसें चलाई जाती हैं।
90 ई-बसें ही रूट पर दौड़ती हैं
शहर में 100 ई-बसों के लिए शासन ने तीर्थांकर कंपनी को अधिकृत किया है। केसीटीएसएल बसों के संचालन की निगरानी करती है और कंपनी को 62.24 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाता है। कंपनी ई-बसों का संचालन, चालकों-परिचालकों की नियुक्ति व मरम्मत कार्य कराती है। एक दिन में शहर में 90 ई-बसें ही रूट पर दौड़ती हैं।
छह लाख रुपये का नुकसान
शुक्रवार को ई-बसों का संचालन न होने से करीब छह लाख रुपये का नुकसान हुआ। कानपुर सिटी ट्रांसपोर्ट लिमिटेड (केसीटीएसएल) के अधिकारियों का दबाव बढ़ने पर तीर्थांकर कंपनी ने शनिवार दोपहर तक हर हाल में वेतन भुगतान कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद चालकों ने शाम को हड़ताल खत्म की और आईआईटी रूट पर छह बसों का संचालन शुरू किया जा सका।
पिछले साल की थी सेवा समाप्त
मुख्य संचालन अधिकारी ने पिछले साल 5927 यात्रियों को बिना टिकट सफर कराने के आरोप में ई-बसों के 40 परिचालकों की सेवा समाप्त कर दी थी। नाराज परिचालकों ने पिछले साल 28 दिसंबर को भी पूरे दिन चक्का जाम रखा था। तब भी पांच लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ था।
वेतन भुगतान के विवाद में चालकों ने चक्काजाम कर दिया। शाम को दोनों पक्षों में वार्ता के बाद सहमति बन गई व संचालन भी शुरू करा दिया गया। -रजनीश राजपूत, मुख्य संचालन अधिकारी, केसीटीएसएल