कानपुर देहात। जिला पंचायत अध्यक्ष सीट पर ढाई दशक से कब्जा जमाए सपा को इस बार हार का झटका लगा। इसकी बड़ी वजह ये रही कि सपा के अपने ही साइकिल पंचर करके विपक्षी खेमे में पहुंच गए। कुछ दिन पूर्व सपा प्रत्याशी ने भी बैठक के दौरान कुछ सदस्यों पर भीतरघात का आरोप लगाया था।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव परिणाम आने के बाद सपा सबसे बड़े दल के रुप में 11 सीट सीटें जीत कर मैदान में आई थी। पार्टी को जीत के लिए केवल छह सदस्यों की जरूरत थी। वहीं अध्यक्ष के चुनाव के दौरान पार्टी के टिकट से जीते छह सदस्य खुलेआम विपक्षी खेमे में शामिल हो गए। इससे सपा के पास केवल पांच सदस्य बचे। वही वोट सपा को मिले। इससे ढाई दशक से चला आ रहा सपा का वर्चस्व खत्म हो गया।
सपा सदस्यों ने बिना किसी परवाह के भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले की बहू नीरजरानी को वोट दिया। उनके खेमे में खुलेआम बैठे नजर आए, साथ ही फोटो भी कराई। इससे सपाई बुरी तरह से मायूस हैं। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव से पहले ही सपा प्रत्याशी राम सिंह यादव ने पार्टी के सदस्यों पर विपक्षियों से मिले होने का आरोप लगाया था। इसके बाद भी समय रहते सपा पदाधिकारी सदस्यों को अपने खेमे में नहीं रोक सके।
इसका असर चुनाव परिणाम में सामने आ गया। सपा जिलाध्यक्ष प्रमोद यादव ने कहा कि चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी बीमार होने की बात कह बीच में सक्रिय नहीं रहे इसका भी असर दिखा। पार्टी से बगावत कर वोट देने वालों की सूची बनाई जा रही है, उन पर भी कार्रवाई होगी।
सांसद ने तैयार किए थे समीकरण
जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट के लिए भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले ने पंचायत चुनाव के पहले से ही पूरे समीकरण तैयार कर रखे थे। वह इसमें कामयाब भी हुए। इस परिणाम से विरोधियों के सामने उनका कद और बढ़ गया। फिलहाल नीरजरानी के अध्यक्ष बनने से भाजपा के एक खेमे में मायूसी व सन्नाटा है। सपा से बगावत कर वोट देने वाले व बसपा सदस्यों के सहयोग से नीरज रानी अध्यक्ष की सीट तक पहुुंची हैं।
भाजपा की सूची देख विपक्षियों ने साधी चुप्पी
परिजनी सीट से जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी के रुप में चुनाव लड़ीं भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले के भाई राजेंद्र सिंह राजू की पत्नी नीरज रानी ने अध्यक्ष की सीट तक का सफर तय कर लिया है। नीरज रानी को भाजपा ने जिपं सदस्य के चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया था इस पर वह पार्टी से बगावत करके चुनाव लड़ी।
वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीतने के बाद भाजपा की ओर से प्रदेश स्तर से जारी नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष की सूची में नीरजरानी का नाम भी शामिल किया गया था। इस पर दल के विपक्षी चुप्पी साध गए।