यहां पर डॉक्टरों की टीम ने उसका परीक्षण किया, जिसमें कोई कमी नहीं मिली। उन्होनें बताया कि करीब चार बजे उसे वन विभाग के जंगल में उसे छोड़ दिया गया। उसे कैद करने में खाना-पीना बंद कर सकता है, जिससे उसके जान-माल का खतरा हो सकता है। वैसे इस प्रजाति के उल्लू हिमालय क्षेत्र में ज्यादा पाए जाते हैं।