सिद्धनाथ घाट पर मूर्ति विसर्जन के दौरान नाव पलटने से नौ लोगों की मौत के बाद अफसर जागे और विसर्जन की व्यवस्था चाक-चौबंद कराई। हादसे की जानकारी से लोग भी डर गए और खुद ही गंगा में जाने से परहेज किया। घाटों पर बनाए गए कृत्रिम तालाबों में ही विसर्जन किया।
जिलाधिकारी ने 26 और 27 सितंबर को मुख्य विसर्जन के मद्देनजर शहर के सभी घाटों पर अलर्ट जारी कर दिया है। सभी घाटों पर पुलिस के साथ पांच-पांच गोताखोर लगा दिए गए हैं। लोगों का कहना था कि जिला प्रशासन इसी तरह घाटों पर पहले से सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद कर देता तो शायद सिद्धनाथ घाट पर हादसा नहीं होता। घाटों पर विसर्जन की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम ने शहर के कुछ प्रमुख घाटों का निरीक्षण लिया। जिसकी रिपोर्ट पेश है।
बाबा घाट (परमट), दोपहर- 2: 12 बजे
घाट पर अफीम कोठी निवासी रमेश चंद्र का परिवार बगैर बैंड-बाजे के शांति पूर्व कृत्रिम तालाब में मूर्ति विसर्जन कर रहा था। वहां मौजूद गोताखोर कल्लू ने बताया कि हादसे के बाद से लोग डरे हुए हैं। रोज की अपेक्षा कम लोग, सिर्फ छह से सात टोलियां ही मूर्ति विसर्जन करने पहुंची। घाट पर पुलिस कर्मियों के साथ ही पांच गोताखोर भी तैनात थे।
सरसैय्या घाट, 2:40 बजे
सरसैया घाट मोड़ पर ही दो पुलिस कर्मी मौजूद थे जो मूर्ति विसर्जन के लिए आने वाले लोगों को रोककर बाबा घाट की तरफ भेज रहे थे। घाट पर एक भी टोली को मूर्ति विसर्जन के लिए गंगा में नहीं जाने दिया गया। घाट पर मौजूद एक दुकानदार ने बताया कि यहां मूर्ति विसर्जन पर रोक है। हादसे के बाद तो किसी को भी नहीं आने दिया जा रहा है।
गोला घाट, 3:10 बजे
गंगाघाट पर बैरीकेडिंग के साथ ही पुलिस बल मौजूद रहा। वहां मौजूद गोताखोर और पुलिस गंगा की तरफ जाने वाले हर व्यक्ति को रोक रहे थे। राजे की अपेक्षा यहां भी भीड़भाड़ कम रही। मूर्ति विसर्जन के लिए आने वाले लोग खुद ही कृत्रिम तालाब में शांतिपूर्वक मूर्ति विसर्जन कर रहे थे।
घंटाघर से मूर्ति विसर्जित करने आए बिल्लू और रिंकू हांडा की टोली में शामिल लोगों ने बताया कि कृत्रिम तालाब में ही विसर्जन करेंगे। भीड़ में महिलाएं और बच्चे भी नहीं थे। इसी तरह गुप्तार घाट और भगवत घाट पर भी कड़ी चौकसी थी। सिपाहियों के साथ ही गोताखोर भी मौजूद थे।