तीन बार सांसद रहने के बाद मुख्यमंत्री बन चुके हैं अखिलेश
पिछले चुनाव में भाजपा के हाथों गंवा चुकी कन्नौज की सीट को फिर से हासिल करने के लिए उनका खुद मैदान में उतरना कितना कारगर होगा, यह मंगलवार को तय हो जाएगा। यहीं से सियासी कॅरियर का आगाज करने वाले अखिलेश यादव तीन बार सांसद रहने के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके हैं।
अलग-अलग अंदाज में प्रचार कर बनाया माहौल
2009 में आखिरी बार यहां से जीते थे। अब वह 15 साल बाद चुनाव वाले दिन भी यहां आकर सियासी गंभीरता दिखाई। देखना है कि जनता ने उनके इस कदम पर कितना भरोसा जताया है। मैदान में उतरने के बाद यहां उन्होंने अलग-अलग अंदाज में प्रचार कर माहौल तो बनाया, चुताया है, यह मंगलवार को तय होगा।
सियासी रुतबे का होगा अंदाजा
मंगलवार को इन सीटों के नतीजे से भी उनके सियासी रुतबे का अंदाजा होगा। इसके अलावा देश-प्रदेश की सत्ता पर काबिज भाजपा से आमने-सामने की टक्कर में वह कितने दमदार साबित हुए हैं, यह उनकी पार्टी को मिले समर्थन से तय होगा। ऐसे में सभी की निगाहें उन पर ही लगी हैं।
भाजपा के बड़े नेता भी लगातार फीडबैक ले रहे
वह 2009 के अपने पहले चुनाव में अखिलेश यादव के सामने मैदान में उतरे थे। तब से लगातार पार्टी उन्हें मौका दे रही है। पिछली बार मिली कामयाबी को इस बार बरकरार रखने में वह कामयाब होते हैं या नहीं, इस पर सभी की निगाह लगी है। भाजपा के बड़े नेता भी लगातार फीडबैक ले रहे हैं।
इमरान के भरोसे पहली जीत की तलाश में बसपा
वर्ष 1997 में कन्नौज को फर्रुखाबाद से अलग करके नया जिला बनाने वाली बसपा को यहां पहली जीत की तलाश है। वर्ष 2014 से पहले के चुनाव में बसपा यहां सपा को कड़ी टक्कर देती रही है, लेकिन जीत की दहलीज से पहले ही उसके कदम ठिठकते रहे हैं।
16 चुनाव में बसपा को कभी भी जीत नहीं मिली
ऐसे में इस बार पार्टी ने कानपुर के निवासी कारोबारी इमरान बिन जफर को मैदान में उतार कर मुस्लिम कार्ड खेला है। अब तक इस सीट पर हुए 16 चुनाव में बसपा को कभी भी जीत नहीं मिली है। इस बार कितना दम लगाया है, यह देखने वाली बात होगी।