उन्नाव के एक परिवार में दुखों का ऐसा सैलाब आया कि आने वाली सभी खुशियां छिन गई। यह खबर जिसने भी सुनीं, कलेजा मुंह को आ गया। परिजनों ने बताया रेखा(32) और अमरपाल(34) की शादी चौदह साल पहले हुई थी लेकिन कोई संतान नहीं हुई। दंपति पुणे में ही रहते थे। परिजनों के अनुसार पति अमरपाल ने पत्नी रेखा के इलाज में काफी रुपया खर्च किया और धार्मिक स्थलों में मन्नतें मांगी। शादी के चौदह साल बीतने के बाद ऊपर वाले ने उनकी मुराद पूरी की। रेखा गर्भवती थी और डाक्टर ने 14 नवंबर डिलीवरी की तारीख दी थी। लेकिन प्रसव के दो दिन पहले रेखा ने आत्महत्या कर ली।
इधर, रेखा की मौत के दो दिन बाद पति अमरपाल की भी मौत हो गई। परिजनों ने बताया अमरपाल पुणे में एक बैट्री कारखाने में काम करता था। माहभर पूर्व वह गंभीर रूप से बीमार पड़ा। छह अक्तूबर को उसे पूना के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डाक्टरों ने किडनी फेल होने की बात बताई तो परिजनों ने इलाज शुरू कराया। ब्रजेश का आरोप है कि पुणे में इलाज के दौरान डाक्टर ने डायलिसिस के बाद गले में भोजन की नली डालने के लिए गलत आपरेशन कर दिया था। इससे गले से कई दिन तक लगातार खून निकलता रहा। धीरे-धीरे उसकी हालत बिगड़ गई। 27 अक्तूबर को उसे घर लाए और लखनऊ के पीजीआई में भर्ती कराया गया। जहां मंगलवार देर रात अमरपार की मौत हो गई।
जिस घर के आंगन ने किलकारियां गूंजने वाली शनिवार को चित्कार से गूंज उठा। परिवार में रेखा और अमरपाल की मौत के साथ आने वाले संतान के इंतजार की आस भी खत्म हो गई। ऊपर वाले को कुछ और ही मंजूर था। ससुर सुक्खीलाल, देवर ब्रजेश, ननद सरिता और मृतका के पिता सत्यनारायण समेत पूरा परिवार काफी खुश था।