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Kanpur News: 25 साल बाद शाम को गिरा पाला, पांच डिग्री लुढ़का पारा

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स्टेशन पर ठंड में परेशान यात्री - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर। 25 वर्षों साल बाद शुक्रवार को शाम से ही महानगर और इसके आसपास के क्षेत्रों में पाला पड़ना शुरू हो गया। देर रात तक पाला गिरा। दिन भर धूप न निकलने और शाम को पाला गिरने से बढ़ी गलन से लोग ठिठुर उठे। अधिकतम तापमान पांच डिग्री लुढ़ककर 14.5 डिग्री सेल्सियस रिकाॅर्ड किया गया। इसे शीत दिवस घोषित किया गया। रात का पारा 7.2 डिग्री सेल्सियस रहा। कानपुर रात के समय प्रदेश के सबसे कम तापमान वाले शहरों में पांचवें स्थान पर रहा।
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वर्ष 2001 में महानगर और आसपास के क्षेत्रों में शाम का पाला पड़ा था। शुक्रवार को पाला पड़ने से रात के समय हवा में नमी में 27 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसी तरह से दिन में नमी 97 और रात में 87 प्रतिशत रही। शाम के समय फुहारें पड़ने से कार सवारों को वाइपर चलाने पड़े। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों में दोपहर में धूप निकल सकती है लेकिन बर्फीली हवाओं के तेज चलने से ठंड बढ़ सकती है। एक सप्ताह तक रही पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता अगले 24 घंटे से कुछ दिनों के लिए खत्म हो रही है। अब उत्तर पश्चिमी हवाओं का सिलसिला तेज होगा। ऐसे में शनिवार को 11 बजे के बाद धूप निकलने की संभावना है लेकिन बर्फीली हवाओं की रफ्तार आठ से नौ किमी प्रति घंटा रहने की वजह से धूप बेअसर रहेगी।
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इन वजहों से गिरा पारा
जब हवा और जमीन का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे चला जाता है तो पाला पड़ता है। इसके लिए हवा में पर्याप्त नमी (जलवाष्प) का होना जरूरी है जो ठंडी सतहों के संपर्क में आकर जमती है। रात में बादल न होने से पृथ्वी से गर्मी विकिरण से अंतरिक्ष में लौट जाती है जिससे सतह जल्दी ठंडी होती है। इसी तरह हवा न चलने से ठंडी और नम हवा सतह के पास बनी रहती है जिससे पाला पड़ने लगता है।
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किसान खेतों में करें हल्की सिंचाई
पाला पड़ने से पौधों की कोशिकाओं में पानी बर्फ बनकर जम जाता है। ऐसे में बर्फ के क्रिस्टल के कारण कोशिकाओं की दीवारें फट जाती हैं। पौधे के अंदर पोषक तत्वों का प्रवाह रुक जाता है और वह सूखने लगता है। पाला से फसलों और पौधों का बचाने के लिए खेतों में हल्की सिंचाई करें। पौधों को प्लास्टिक शीट या भूसे से ढंकें। खेतों में धुआं करें। इसके साथ गंधक (सल्फर) का घोल भी छिड़कें।

14 के बाद ठंड से मिल सकती राहत
दिसंबर के आखिरी सप्ताह में लगातार शीत दिवस के बाद जनवरी के शुरुआत से ही शीत दिवस शुरू हो गया है। यह अलग-अलग दिनों में अगले 14 जनवरी तक चल सकता है। उसके बाद ठंड में थोड़ी कमी आने की संभावना है। - डॉ. एसएन सुनील पांडेय, मौसम विशेषज्ञ


ठंड में 64 को हार्ट अटैक, 13 को ब्रेन स्ट्रोक, नौ की मौत

कानपुर। गलन भरी ठंड में हार्ट अटैक के 64 और ब्रेन स्ट्रोक के 13 रोगियों को गंभीर हालत में एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट और हैलट इमरजेंसी में भर्ती किया गया। ब्रेन स्ट्रोक के कई रोगियों की अधिक ब्लड प्रेशर बढ़ जाने के कारण मस्तिष्क की नसें फट गईं। साथ ही नौ रोगी मृतावस्था में अस्पतालों में आए। इन रोगियों की अस्पताल पहुंचने के पहले ही मौत हो गई।

कार्डियोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि शुक्रवार को ओपीडी में 861 रोगियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। हार्ट अटैक के लक्षण वाले 64 रोगी भर्ती हुए हैं। सात रोगी मृतावस्था में अस्पताल पहुंचे। गुरुवार को कार्डियोलॉजी इमरजेंसी में 153 रोगी आए। हैलट इमरजेंसी में रात आठ बजे से 94 रोगी भर्ती हुए। इनमें 13 ब्रेन स्ट्रोक के रोगी रहे हैं। हैलट के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि इस बार जाड़े में ब्रेन स्ट्रोक के रोगी बढ़े हैं। इनमें ब्रेन हेमरेज वालों की संख्या अधिक रहती है। इन रोगियों के आंकड़े इकट्ठे करके विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।



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तापने में जलने वालों की संख्या बढ़ी



लकड़ियां जलाकर तापने के चक्कर में आग से जलने वालों की संख्या बढ़ गई है। लोगों के हाथ और चेहरे जल जा रहे हैं। कुछ के कपड़ों में आग लग जाती है। इनमें वृद्धों की संख्या अधिक रहती है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर प्लास्टिक सर्जन डॉ. प्रेम शंकर ने बताया कि हर ओपीडी में तापने में जलने वाले तीन-चार रोगी आ रहे हैं। इनके 20 से 40 प्रतिशत तक बर्न रहता है।
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