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बड़ा खतरा: सूअरों में अफ्रीकन फीवर की पुष्टि, इंसानों में फैली बीमारी तो होगी समस्या, इन बातों का रखें ध्यान

Mon, 25 Jul 2022 10:12 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कानपुर शहर में अभी तक 100 से अधिक सूअरों की मौत हो चुकी है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी आरपी मिश्रा ने बताया कि अफ्रीकन फीवर की अभी कोई दवा नहीं बनी है। इसके लिए डॉक्टरों की टीम गठित कर दी गई है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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गोविंद नगर क्षेत्र के आसपास मरे मिले पांच सूअरों में अफ्रीकन फीवर की पुष्टि हो गई है, इससे खतरा बढ़ गया है। अफ्रीकन फीवर से अभी तक सूअर ही मर रहे हैं लेकिन इंसानों के प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। अगर यह बीमारी सूअरों से इंसानों में फैली तो समस्या खड़ी हो जाएगी। शहर के मोहल्लों में सूअर टहला करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अफ्रीकन फीवर फैलाने वाला रोगाणु भी वायरस है। ये वायरस बहुत तेजी से म्यूटेशन करते हैं। स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू वायरस भी म्यूटेशन से इंसानों में आए हैं।

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माइक्रोबायोलॉजी के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति ने अफ्रीकन फीवर से संक्रमित सूअर का मांस खा लिया तो वायरस उसमें जाकर म्यूटेट कर सकता है। फिर मानव से मानव में संक्रमण फैल सकता है। ज्यादातर वायरल संक्रमण इसी तरह जानवरों से इंसानों में आए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सूअर बीमारियों का हब होता है। इससे कई तरह की वायरल और बैक्टीरिया बीमारियां इंसानों में होती हैं। जिस तरह अफ्रीकन फीवर सूअरों में फैल रहा है, उससे खतरा बढ़ रहा है। लेकिन अभी तक सेंटर आफ डिजीज कंट्रोल अटलांटा ने इसे सूअर से सूअर में फैलने वाली बीमारी माना है लेकिन इतनी आशंका जरूर जाहिर की है कि मनुष्य प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से इसका कैरियर हो सकता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रिचा गिरि का कहना है कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर का इंसानों में आने का खतरा बना हुआ है। वायरस कब म्यूटेट करेगा? इसका पता नहीं रहता है। बहुत दिनों तक वायरस के मानव शरीर में रहने से इसका रूप बदलता है और फिर यह मानव से मानव में संक्रमण करने लगता है।

 

मेडिकल कॉलेज के माइक्रबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा का कहना है कि अभी तक सीडीएस मानव के कैरियर होने की आशंका व्यक्त कर रहा है। लेकिन वायरस के म्यूटेशन का खतरा रहता है। मानव शरीर में पहुंचने के बाद स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू और मंकी पॉक्स ने म्यूटेशन किया और महामारी बन गए। अभी यह सूअर से सूअर का संक्रमण ही माना जा रहा है। इससे रोकथाम के लिए सारे सूअरों को हटाना पड़ता है। जिला सर्वेलांस अधिकारी एसीएमओ डॉ. सुबोध प्रकाश ने बताया कि अभी मानव में अफ्रीकन फ्लू रिपोर्ट नहीं है लेकिन वायरस का म्यूटेशन तो कभी भी हो सकता है। 

 

एडवाइजरी
  • सूअर का मांस न खाएं, अधपका मांस को कतई नहीं
  • सूअरों को आबादी से बाहर करें, उन्हें नजदीक रहने दें
  • बीमार सूअर के शरीर से निकलने वाले द्रव्य को शरीर में न लगने दें
  • घरों के आसपास सफाई रखें, पानी भरा न रहने दें जिससे सूअर न आने पाएं
  • बीमार सूअर को घरों के आसपास से तुरंत हटा दें
  • हाथों की सफाई रखें, बाहर निकलने पर मास्क लगाएं
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गोविंद नगर में पांच सूअरों में अफ्रीकन फीवर की पुष्टि
गोविंद नगर क्षेत्र के आसपास मरे मिले पांच सूअरों में अफ्रीकन फीवर की पुष्टि हो गई है। एक सप्ताह पहले निराला नगर मैदान में मृत मिले एक सूअर और चार बीमार सूअरों के खून का सैंपल जांच के लिए भोपाल की हाई डायग्नॉस्टिक लैब भेजा गया था। रविवार को आयी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। अब जहां भी सूअरों के शव मिल रहे हैं वहां दहशत फैल रही है। सूअरों में अफ्रीकन फीवर की पुष्टि होने से पशुपालन विभाग चौकन्ना हो गया है। गोविंद नगर क्षेत्र में पांच टीम लगाई गईं। पालकों को बाड़े के अंदर सूअर रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बाड़ों को सैनिटाइज करने को कहा है।
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