विशेषज्ञों का कहना है कि सूअर बीमारियों का हब होता है। इससे कई तरह की वायरल और बैक्टीरिया बीमारियां इंसानों में होती हैं। जिस तरह अफ्रीकन फीवर सूअरों में फैल रहा है, उससे खतरा बढ़ रहा है। लेकिन अभी तक सेंटर आफ डिजीज कंट्रोल अटलांटा ने इसे सूअर से सूअर में फैलने वाली बीमारी माना है लेकिन इतनी आशंका जरूर जाहिर की है कि मनुष्य प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से इसका कैरियर हो सकता है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रिचा गिरि का कहना है कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर का इंसानों में आने का खतरा बना हुआ है। वायरस कब म्यूटेट करेगा? इसका पता नहीं रहता है। बहुत दिनों तक वायरस के मानव शरीर में रहने से इसका रूप बदलता है और फिर यह मानव से मानव में संक्रमण करने लगता है।
मेडिकल कॉलेज के माइक्रबायोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. विकास मिश्रा का कहना है कि अभी तक सीडीएस मानव के कैरियर होने की आशंका व्यक्त कर रहा है। लेकिन वायरस के म्यूटेशन का खतरा रहता है। मानव शरीर में पहुंचने के बाद स्वाइन फ्लू, बर्ड फ्लू और मंकी पॉक्स ने म्यूटेशन किया और महामारी बन गए। अभी यह सूअर से सूअर का संक्रमण ही माना जा रहा है। इससे रोकथाम के लिए सारे सूअरों को हटाना पड़ता है। जिला सर्वेलांस अधिकारी एसीएमओ डॉ. सुबोध प्रकाश ने बताया कि अभी मानव में अफ्रीकन फ्लू रिपोर्ट नहीं है लेकिन वायरस का म्यूटेशन तो कभी भी हो सकता है।
गोविंद नगर में पांच सूअरों में अफ्रीकन फीवर की पुष्टि
गोविंद नगर क्षेत्र के आसपास मरे मिले पांच सूअरों में अफ्रीकन फीवर की पुष्टि हो गई है। एक सप्ताह पहले निराला नगर मैदान में मृत मिले एक सूअर और चार बीमार सूअरों के खून का सैंपल जांच के लिए भोपाल की हाई डायग्नॉस्टिक लैब भेजा गया था। रविवार को आयी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। अब जहां भी सूअरों के शव मिल रहे हैं वहां दहशत फैल रही है। सूअरों में अफ्रीकन फीवर की पुष्टि होने से पशुपालन विभाग चौकन्ना हो गया है। गोविंद नगर क्षेत्र में पांच टीम लगाई गईं। पालकों को बाड़े के अंदर सूअर रखने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही बाड़ों को सैनिटाइज करने को कहा है।