अनुशासन और सेवा के संकल्प के साथ शनिवार को आनंदपुरी में तेरापंथ धर्म संघ के मर्यादा महोत्सव अनुष्ठान का शुभारंभ किया गया। तीन दिवसीय महोत्सव के पहले दिन आचार्यश्री महाश्रमण जी ने सेवा का महत्व बताया।
कहा सेवा से धर्मसंघ की वृद्धि और समृद्धि बढ़ती है। सेवक को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। मुख्य अतिथि विहिप के संरक्षक डॉ. अशोक सिंघल ने आचार्यश्री से आशीर्वाद लिया।
आचार्यश्री ने बताया कि तेरापंथ प्रारंभ धर्म संघ के चतुर्थ आचार्य जयाचार्य जी ने 151 वर्ष पूर्व मर्यादा महोत्सव का प्रारंभ किया था। तीन दिवसीय मर्यादा महोत्सव का प्रारंभ वसंत पंचमी से किया जाता है। महोत्सव में समाज के लोगों को अनुशासन और मर्यादा का पालन करने का संदेश दिया जाता है।
महोत्सव में साधु, साध्वियां आचार्य की सेवा के लिये अपनी नियुक्ति की मांग करती हैं। विश्व में तेरापंथ धर्म संघ ही एक मात्र ऐसा संघ है जहां, अनुशासन और मर्यादा के लिए इस प्रकार का आयोजन किया जाता है।
आचार्य प्रवर ने कहा कि सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। विहिप नेता डॉ. अशोक सिंघल ने मर्यादा महोत्सव की स्मृति में आचार्यश्री भिक्षु के चांदी के सिक्के का लोकार्पण किया।
समिति की तरफ से डॉ. अशोक सिंघल और राज्यसभा के पूर्व सांसद ईश्वरचंद्र गुप्ता को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में समिति के पदाधिकारी बछराज बूचा, गणेशमल जैन, टीकमचंद्र सेठिया, धनराज सुराना मौजूद रहे।