भारतीय रेलवे के 'सुपरफास्ट' दावों की पोल शुक्रवार को उस समय खुल गई जब वाराणसी से मुंबई जाने वाली लोकमान्य तिलक टर्मिनल एक्सप्रेस के यात्री सिस्टम के खिलाफ सड़क पर... यानी पटरी पर उतर आए। बनारस से कानपुर तक बिना एसी और बिना पानी के सफर करने को मजबूर यात्रियों का सब्र गोविंदपुरी (गोविंद नगर) स्टेशन पर टूट गया। यात्रियों ने ट्रेन रोककर करीब आधे घंटे तक जमकर हंगामा किया, जिससे रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
एसी फेल, कोच बना 'भट्ठी'
यात्रियों का आरोप है कि ट्रेन के वाराणसी से चलते ही B1, B2, B3 और B4 कोच के एसी ने काम करना बंद कर दिया था। बाहर भीषण गर्मी और कोच के भीतर उमस के कारण यात्रियों का हाल बेहाल हो गया। बच्चों और बुजुर्गों की हालत बिगड़ने लगी तो यात्रियों ने 'रेल मदद' पोर्टल और टीटीई से शिकायत की, लेकिन घंटों तक कोई सुनवाई नहीं हुई। यात्रियों का कहना था कि बनारस से कानपुर तक का सफर किसी प्रताड़ना से कम नहीं था। एसी कोच पूरी तरह 'भट्ठी' बन चुके थे और खिड़कियां बंद होने के कारण सांस लेना भी दूभर हो रहा था।
न हवा मिली, न पानी: बूंद-बूंद को तरसे यात्री
सिर्फ एसी ही नहीं, बल्कि कोचों में पानी की किल्लत ने आग में घी डालने का काम किया। यात्रियों ने बताया कि कोच के शौचालयों और वॉश बेसिन में बूंद भर पानी नहीं था। भीषण गर्मी में प्यास बुझाने के लिए यात्रियों को हर स्टेशन पर बाहर भागना पड़ रहा था, लेकिन ट्रेन के भीतर पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। रेल प्रशासन की इस लापरवाही के खिलाफ यात्रियों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया।
गोविंदपुरी स्टेशन पर हंगामा, रेल प्रशासन के फूले हाथ-पांव
जैसे ही ट्रेन दोपहर में कानपुर के गोविंदपुरी स्टेशन पहुंची, आक्रोशित यात्रियों ने हंगामा शुरू कर दिया । कोच B1 से B4 तक के दर्जनों यात्री नीचे उतर आए और इंजन के सामने खड़े होकर नारेबाजी शुरू कर दी। यात्री मांग कर रहे थे कि जब तक एसी ठीक नहीं होता और पानी नहीं भरा जाता, ट्रेन आगे नहीं बढ़ने देंगे। हंगामे के चलते स्टेशन पर मौजूद अन्य यात्री भी सहम गए। सूचना मिलते ही आरपीएफ और जीआरपी के जवान मौके पर पहुंचे और यात्रियों को समझाने का प्रयास किया।