सॉफ्टवेयर इंजीनियर से लेखक बने कानपुर के तिलक नगर निवासी 31 वर्षीय अभिषेक कपूर के पहले अंग्रेजी उपन्यास (नॉवेल) द सेल्फिश बेट्रायल्य की लांचिंग रविवार को लाजपत नगर स्थित एक रेस्टोरेंट में हुई। मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर नवीन सिंह ने उपन्यास का विमोचन किया। इस अवसर पर नवीन सिंह ने कहा कि बिना किताबों के जीवन शून्य है। इतिहास हो या विज्ञान किताबों के बिना सब अधूरा है।
अभिषेक ने बताया कि उपन्यास की काल्पनिक कहानी कानपुर के परिदृश्य पर आधारित है। यह एक रोमांचकारी नॉवेल है। पुस्तक का विषय विश्वासघात है। कहानी के जरिए यह बताया गया है कि लोग अपने प्रियजनों के साथ भी पैसे, प्यार, घृणा व बेबसी के कारण विश्वासघात कर सकते हैं। कहानी का पात्र अपने दम पर शहर में हुई एक मॉडल की हत्या की गुत्थी पुलिस से पहले सुलझाने की कोशिश करता है। वह सफल हुआ या नहीं, यह रहस्य की बात है। किताब के जरिए कानपुर की संस्कृति, जीवनशैली को दुनिया भर में प्रसिद्ध करना है।
अभिषेक ने बताया कि वह अगस्त 2018 में नॉवेल लिखना शुरू किया और इस साल मार्च में यह पूरा हुआ। कहानी के कुछ विश्वासघात मेरे साथ भी हुए हैं। यह नॉवेल मेरे दोेनों बच्चों को समर्पित है, जो एक दुर्घटना में इस दुनिया में नहीं रहे। विमोचन के मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. ओमेंद्र कुमार, प्रकाशक विवेक मिश्रा, उमेश शुक्ला, संजय गुप्ता, मानसिंह बग्गा, सुरेश श्रीवास्तव, विजयभान सिंह, अंकित शुक्ला आदि रहे।
प्रोफाइल
अभिषेक के पिता शरद कपूर शार्ट फिल्मों के निर्माता हैं। सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल के बाद अभिषेक ने बंगलूरू के पीईएस कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। उन्होंने इंफोसिस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर, नोकिया सीमेंस नेटवर्क के लिए अपनी सेवाएं दीं। नौकरी छोड़कर खुद का काम शुरू किया और नोकिया, इंटेल, इसरो आदि को सेवाएं दीं।जागरूक इंडिया नामक एक ऑनलाइन अभियान चलाया। इसमें राष्ट्रीय विषय के संबंध में लोगों को जागरूक किया गया। मन्नू, बॉस्केट, 2 मंथ आदि शार्ट फिल्मों में स्क्रिप्ट, डायरेक्शन, प्रोडक्शन की जिम्मेदारी निभाई।