फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'दहशत के 58 घंटे' 'हर पल आंखों के सामने मौत', डकैतों के चंगुल से छूट अपनों से मिले, सुनाई ये दास्तां

Fri, 26 Oct 2018 08:49 PM IST
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
डेमो पिक
विज्ञापन
चित्रकूट: कुख्यात डकैतों के चंगुल से सकुशल छूटकर परिजनों के पास पहुंचे रिटायर्ड वन कर्मी समेत तीनों अपहृतों की आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे। जंगल से किस तरह घर पहुंचने की बात पूछते ही उनकी जुबान में भयवश ताला लग गया। चेहरे पर इतना भय कि जुबान से आवाज तक नहीं निकल रही थी। काफी देर बाद उन्होंने बताना शुरू किया कि दहशत के वो 58 घंटों में हर क्षण उनके आंखों के सामने मौत नाचती रही। तीनों का स्वास्थ्य भी खराब हो रहा था भरपेट भोजन व पानी नहीं मिल रहा था।  
विज्ञापन


रिटायर्ड एसडीओ रामाश्रय पांडेय व रिटायर्ड लिपिक सुरेश त्रिपाठी ने बताया कि जानकीकुंड से आंख का इलाज कराने के बाद जब वह लौट रहे थे तो डाकूओं का सड़क पर आतंक चल रहा था। डकैत उनका नाम पता पूछकर पकड़कर जंगल ले गए। रातो रात करीब 25 किमी पैदल चलाकर पत्थरों के नीचे पहुंचे। वहीं पर दिन रात रहे। पहले छह डाकू थे दूसरे दिन बुधवार को दो और डाकू आए जिसमें एक को सभी भैया कह रहे थे। संभावना है कि वह डाकू बबुली था और जो पकड़कर ले गया था वह लवलेश था। अपहृतों ने बताया कि वह किसी को पहचानते नहीं हैं। पहले दिन डकैतों ने तीनों को डंडे से मारा पीटा लेकिन उसके बाद से एक भी बार नहीं मारा पीटा। बस मोबाइल से परिजनों से बातचीत कराकर फिरौती मंगाने को कहा। न पहुंचाने पर जान से मारने की धमकी दे रहे थे। अपहृतों ने बताया कि उनके आंख में दिन में एक बार पट्टी बांधी गई इसके बाद शाम होते ही हटा ली जाती थी। 

 
विज्ञापन

डकैतों ने कहा कि चुपचाप चले जाओ

गुरुवार की रात को जब उन्हें छोड़ा गया तो डकैतों ने कहा कि चुपचाप चले जाओ। सीधे जाना फिर सड़क मिलेगी। लगभग कांटे व पत्थरों के बीच अंधेरे में वह जान बचाकर लगभग छह किमी तक पैदल आगे बढ़े उन्हें कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। रुकने पर जान जाने का खतरा था। सड़क मिलने पर यह नहीं पता कि कौन सा स्थान है कुछ देर बाद कुछ लोग गांव के बाहर सोते मिले तो उनसे रींवा का रास्ता पूछा तब जाकर किसी तरह वह घर पहुंचे। 

अमर उजाला ने छापा था कि पुलिस अधिकारियों ने डाकू बबुली व लवलेश के परिजनों को पकड़ा हैै। उनके माध्यम से दबाव बनाया जा रहा है। शुक्रवार को जब तीनों अपहृत छूटकर घर पहुंचे तो उन्होंने बताया कि पुलिस ने डकैतों के परिजनों को पकड़ा था इसकी जानकारी डकैतों को थी और उनसे फोन पर बातचीत भी हुई थी। परिजनों ने भी कहा था कि तीनों को जल्द छोड़ दें। 


तीनों अपहृतों के छूटने पर पुलिस अधिकारी राहत की सांस तो ले रहे हैं लेकिन रींवा के आईजी उमेश जोगा ने दावा किया कि अब डकैतों को मप्र. क्षेत्र में नहीं रहने दिया जाएगा। इस कांड के बाद डकैत गैंग यूपी क्षेत्र की ओर भागा। उसे पकड़ने के लिए वह खुद भारी पुलिस टीम लेकर धारकुंडी व मारकुंडी के जंगल तक पहुंचे। यूपी क्षेत्र में मप्र. पुलिस टीम ने कांबिंग की। इधर मानिकपुर मारकुंडी व बहिलपुरवा पुलिस टीम ने भी जंगलों में कांबिंग की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें