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खां साहब खफा

Sat, 28 Mar 2015 03:27 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
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प्रदेश सरकार के  संसदीय कार्य और नगर विकास मंत्री आजम खां श्रम विभाग की ओर से मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को सेस वसूली का नोटिस भेजने से नाराज हैं। उनकी नाराजगी की तपिश से शहर स्थित श्रमायुक्त मुख्यालय के अधिकारी तक खौफजदा हैं।
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मंत्री के पत्र की एक प्रति यहां श्रमायुक्त मुख्यालय में आई है। स्थानीय अफसरों को इसका जवाब नहीं सूझ रहा है आैर न ही कोई इस बारे में ख्ुलकर बोलने को ही तैयार है। श्रम विभाग के मुरादाबाद स्थिति क्षेत्रीय कार्यालय ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर कई करोड़ रुपये के सेस वसूली की बकाएदारी निकालकर पिछले महीने नोटिस भेजा था।

इसमें विश्वविद्यालय की कीमत कई हजार करोड़ रुपये बताई गई थी, नोटिस के एवज में विश्वविद्यालय ने सेस नहीं जमा कराया। इसके अलावा आजम खां ने पूरे मसले की जानकारी 4 मार्च को पत्र लिखकर सीएम को भी दे दी। अब आजम खां ने 25 मार्च को प्रमुख सचिव श्रम को एक पत्र लिखकर उनसे सेस वसूली के नियम और कायदे बिंदुवार बड़े ही तल्ख लहजे में पूछे हैं।  
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खां साहब का ‘दर्द’

भारत में एक प्रदेश उत्तर प्रदेश है, जहां का मैं रहने वाला हूं। एक राजनीतिक कार्यकर्ता होने के कारण मेरा कर्तव्य मात्र सेवा देना है किंतु आप एक बड़े अधिकारी हैं और इसी के नाते आपके अधिकार अपार हैं। राजनेता होने के कारण सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के बहुत सितम सहे हैं।

मैंने इस विश्वविद्यालय को बनाने के लिए छोटा से छोटा चंदा, जिसमें पांच रुपये भी शमिल है। आपके अधीनस्थ अधिकारी ने विश्वविद्यालय की कीमत इतने हजार करोड़ रुपये की आंकी है कि मेरे लिए इतनी रकम को गिनना भी संभव नहीं है। उसी एतबार से उस पर जो सेस लगाया गया। वह मेरे लिए ख्यालों से ऊपर की बात है।

पत्र में आगे लिखा है कि इस संबंध में 4 मार्च को पत्र संख्या 318 आर/ मां.मं.सं./नंवि./2015 मेरे द्वारा मुख्यमंत्री उप्र सरकार को भेजा गया है।

अवश्य ही वह आपके संज्ञान में होगा। आशा करता हैं कि इसे आप अन्यथा न लेंगे और अपने अपार अधिकारों में इसे दखलंदाजी नहीं मानेंगे और मेरे जैसे ‘कमजोर व्यक्ति’ को अकारण विभाग द्वारा प्रताड़ित नहीं करेंगे, क्यों कि मैंने सही या गलत मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय बनाकर ऐसा कौन सा गुनाह कर दिया है जिस पर आपका विभाग उसे बदनाम करने, बर्बाद करने और बंद करने के लिए कमर कस चुका है।

यदि एक हफ्ते में उत्तर नहीं मिलता है तो मुझे किसी सक्षम न्यायालय में जाना पड़ सकता है। श्रम विभाग द्वारा जारी नोटिस आधारहीन है और जो भी कुछ देनदारी तय की गई है वह सच्चाई से इतना दूर है जैसे जमीन से आसमान की दूरी।

सेस वसूली का यह है नियम

उत्तर प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण अधिनियम के तहत 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की किसी भी प्रकार की संपत्ति चाहे वह निजी हो या सरकारी उसके निर्माण पर एक प्रतिशत सेस श्रम विभाग वसूलता है। सेस वसूली की राशि का उपयोग भवन एवं सन्निर्माण बोर्ड के तहत चलाई जा रही 14 योजनाओं पर खर्च किया जाता है। इन योजनाओं में सरकार की महत्वपूर्ण साइकिल वितरण योजना भी शामिल है।
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