कानपुर देहात/राजपुर। जनपद के एक नगरीय व 29 ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर रविवार को मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन किया गया। कई केंद्रों पर यह आयोजन केवल आयुष डॉक्टरों के भरोसे ही सिमट कर रह गया। एलोपैथिक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की गैरमौजूदगी के चलते गंभीर व पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बैरंग लौटना पड़ा या फिर बिना परामर्श के ही संतोष करना पड़ा।
मेले में अव्यवस्था का आलम यह रहा कि दोपहर तक न तो कोई मेडिकल ऑफिसर (एमओ) केंद्रों पर पहुंच और न ही कोई विशेषज्ञ डॉक्टर, ऐसे में ओपीडी की पूरी जिम्मेदारी आयुष डॉक्टरों को संभालनी पड़ी।
इलाज के लिए राजपुर से आईं मंजू देवी व आंबेडकर नगर की शोभा रानी ने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों के न होने से उन्हें अपनी बीमारियों के संबंध में सही सलाह और इलाज नहीं मिल पा रहा। इससे लगातार दवा खाने के बाद भी आराम नहीं मिल रहा। हालांकि, कुछ केंद्रों पर चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी (एमओआईसी) ने निरीक्षण की औपचारिकता जरूर निभाई लेकिन डॉक्टरों की कमी और व्यवस्थाओं की इस बड़ी खामी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यहां तक कि आरोग्य मेला पर्यवेक्षकों ने भी कई केंद्रों का रुख नहीं किया।
इधर, रसधान पीएचसी के मेले में 34 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इलाज के लिए पहुंचे अधिकांश मरीज बुखार, फंगल इंफेक्शन, पेट दर्द और शुगर जैसी समस्याओं से परेशान दिखे। केंद्र पर तैनात डॉ. सना कौसर ने बताया कि तेज धूप और उमस के कारण इन दिनों डिहाइड्रेशन और पेट में संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। वहीं राजपुर पीएचसी में दोपहर तीन बजे तक करीब 33 मरीजों का उपचार किया गया। यहां भी बुखार, खांसी, पेट दर्द और त्वचा रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या अधिक रही। आयुष चिकित्सक डॉ. नीलू कटियार व आयुष फार्मासिस्ट शंकर सिंह ने मरीजों का परीक्षण कर दवाइयां वितरित कीं।
वहीं, राजपुर पीएचसी प्रभारी डॉ. सलिल सचान ने बताया कि मेले में आयुष चिकित्सक नीलू के अलावा एमबीबीएस डॉ. मनोज सर्राफ ने भी मरीजों का परीक्षण कर इलाज किया है। वहीं नोडल अधिकारी व डिप्टी सीएमओ आदित्य सचान ने बताया कि पीएचसी प्रभारी को आरोग्य मेले में एमबीबीएस डॉक्टर की ड्यूटी सुनिश्चित कराने के सख्त हिदायत दी गई है।