कानपुर। एक जिले में डीएम पद पर तैनात आईएएस अधिकारी के पिता श्रीनारायण त्रिपाठी ने पुलिस पर कार्रवाई के बाद सुनवाई न करने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि मंदिर में मिलने वाले दान के विवाद में पुलिस ने छह लोगों पर शांतिभंग की कार्रवाई की है। यह किसी सोची समझी रणनीति के तहत किया गया। जिस दिन का यह मामला है, वे उस दिन वहां थे ही नहीं। निष्पक्ष जांच कराने के लिए वे थाने और एसीपी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
कल्याणपुर केशवपुरम निवासी श्रीनारायण विकासनगर स्थित जुगल देवी शिशु मंदिर शाखा के प्रबंधक भी हैं। उन्होंने बताया कि केशवपुरम बरगद चौराहे के पास नीलकंठेश्वर धाम मंदिर है। इसमें आपसी सहयोग से 25 से 30 लाख रुपये खर्च कर मंदिर का निर्माण कराया गया। इसके अलावा पास में एक और मंदिर का जीर्णोद्धार भी कराया गया था। मंदिर के पुजारी का वेतन और मंदिर का निर्माण, मूर्तियां लाना या अन्य कार्य सभी मिलकर करते है। बताया जाता है कि उसी इलाके के रहनेे वाले बिंदा सिंह नाम के एक व्यक्ति ने फर्जी तरीके से चिटफंड ऑफिस में मंदिर के नाम समिति बनाकर रजिस्ट्रेशन करा लिया। इसके बाद उसका दखल और बढ़ गया। रजिस्ट्रेशन कराए जाने की जानकारी होने पर लोगों ने इसकी शिकायत एसीएम से की। जांच के रजिस्ट्रेशन निरस्त हो गया। आरोप है कि इस समिति में कुछ मृत व्यक्तियों के नाम भी लिखे गए थे। इसी वजह से वह कोर्ट से भी निरस्त हो गई।
बताया जाता है कि पुजारी और अन्य खर्चों लिए पुलिस के सामने मंदिर की गोलक खोली गई। इसकी पूरी वीडियो भी बनाई गई है। गोलक से निकला पैसा वहीं के एक व्यक्ति को सौंप दिया गया। श्रीनारायण का कहना है कि जब यह सब हुआ तब वह वहां नहीं थे। उसी दिन दान के पैसे को लेकर हंगामा शुरू हो गया तो पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ शांति भंग में रिपोर्ट दर्ज करा दी। आरोप है कि डीएम के पिता का नाम एफआईआर में पेन से अलग लिख दिया गया। अब पुलिस सुनवाई नहीं कर रही है।
एसीपी अभिषेक पांडे ने बताया कि इसकी जांच कराई जाएगी। अगर श्रीनारायण वहां नहीं थे तो उनका नाम हटना चाहिए। बताया जाता है कि जिसने रिपोर्ट दर्ज कराई हैं, उनकी डीएम के पिता के साथ पहले से किसी मामले में अनबन रही है।
इन लोगों पर दर्ज हुई रिपोर्ट
त्रिवेणी प्रसाद दीक्षित, तेज नारायण शुक्ला, जगदीश नारायण दुबे, विवेक शुक्ला, मनोज तिवारी, श्रीनारायण त्रिपाठी।
झूठ बोलकर निरस्त कराई समिति
श्रीनारायण और इनके साथ कुछ और लोगों ने मेरी तरफ से जो समिति बनाई गई थी, उसके संबंध में अधिकारियों के सामने झूठ बोलकर उसे निरस्त करा दिया। हमने सभी को जोड़कर साथ चलने की बात कही थी। यह मुकदमा पुलिस ने दर्ज किया है, हमने नहीं कराया है। - बिंदा सिंह