कानपुर। डॉ. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी फॉर दिव्यांगजन (एआईटीडी) में सोमवार को छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू हुआ। एआईसीटीई के एटीएएल के तहत आयोजित यह ऑफलाइन कार्यक्रम 31 अक्तूबर तक चलेगा। शिक्षकों, शोधार्थियों और पीजी विद्यार्थियों को ऊर्जा प्रणालियों, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीकी समझ विकसित करने की जानकारी दी जाएगी।
उद्घाटन सत्र में आईआईटी कानपुर के स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी के प्रो. देबोपम दास ने कहा कि विकास की जरूरतें पूरी करने के साथ ऊर्जा संसाधनों का विवेकपूर्ण इस्तेमाल और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण जरूरी है। ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन एक-दूसरे से जुड़े हैं। इनके बीच संतुलन बनाकर ही सतत भविष्य की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने ऊर्जा के सही उपयोग और भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने पर जोर दिया।
दूसरे सत्र में एचबीटीयू के प्रो. कुमार गौरव ने मानव मूल्यों पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में सीएसजेएमयू, एचबीटीयू, एक्सिस, महाराणा प्रताप और केआईटी समेत कई संस्थानों के शिक्षक, शोधार्थी और पीजी विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। आगामी सत्रों में ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और सतत विकास में तकनीकी नवाचार पर चर्चा होगी।
मंगलवार को आईआईटी कानपुर के प्रो. जे. रामकुमार और आईआईआईटी के विनीत तिवारी के सत्र प्रस्तावित हैं। इनमें ऊर्जा और पर्यावरण संबंधी चुनौतियों के व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में प्रो. पीके कमानी डीन ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल की सलाहकार भूमिका में हैं। डॉ. अनुज श्रीवास्तव समन्वयक और डॉ. अजय कुमार मौर्य सह-समन्वयक हैं।