छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में व्याख्यान देते डॉ. धनंजय चोपड़ा।
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कानपुर। एक प्रभावशाली तस्वीर केवल दृश्य नहीं बल्कि एक संपूर्ण कथा होती है जिसे समझने के लिए संवेदनशील दृष्टि आवश्यक है। यह बात छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर एवं मीडिया विशेषज्ञ डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कही।
विभाग की ओर से फोटो जर्नलिज्म के विविध आयामों पर आयोजित विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल डॉ. चोपड़ा ने कहा कि फोटो जर्नलिज्म की जड़ें प्राचीन काल की चित्रात्मक अभिव्यक्तियों में मिलती हैं।
कार्यक्रम में उन्होंने फोटो पत्रकारिता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्वरूप और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. चोपड़ा ने कहा कि गहन दृष्टि से खींची गईं तस्वीरें कई बार राष्ट्रीय समाचार पत्रों की सुर्खियां बनीं और समाज को प्रभावित किया।
उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से फोटो पत्रकारिता के उदाहरण प्रस्तुत किए जिससे छात्रों को व्यावहारिक समझ भी मिली। इसके साथ विद्यार्थियों को 21वीं सदी की चुनौतियों के अनुरूप नए दृष्टिकोण और नवाचार अपनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में छात्रों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और संवाद में भाग लिया। अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल शर्मा ने फोटो पत्रकारिता के ऐतिहासिक स्वरूप पर विचार रखे। कार्यक्रम में डॉ. योगेंद्र पांडेय, डॉ. जीतेंद्र डबराल, डॉ. रश्मि गौतम, डॉ. हरिओम एवं सागर कनौजिया मौजूद रहे। संचालन डॉ. ओम शंकर गुप्ता ने किया।