कानपुर। दिव्यांग और बेसहारा बच्चों के कल्याण के उद्देश्य से 104 वर्ष पहले लीज पर दी गई करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी नजूल भूमि पर शादी-विवाह और अन्य व्यावसायिक कार्यक्रम होते मिले। तहसील की जांच में मकरावटगंज स्थित द्वारिका प्रसाद चैरिटेबल ट्रस्ट (अयोध्या लॉन) पर लगे आरोप सही पाए गए हैं। रिपोर्ट शासन को भेजते हुए फ्रीहोल्ड भूमि को छोड़कर पूरी नजूल भूमि दोबारा सरकारी अभिलेखों में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, रिपोर्ट के अनुसार केडीए कब्जा लेगा।
रिपोर्ट में बताया गया कि ट्रस्ट के पास नजूल ब्लॉक संख्या-12, प्लॉट संख्या-18 की करीब तीन एकड़ 39 पोल 16 वर्गमीटर भूमि दर्ज है। यह भूमि रेजिडेंशियल हाउस एंड गार्डन के रूप में रिकॉर्ड में दर्ज थी। वर्ष 1902 में आरवीएल कन्हैया लाल को 90 वर्ष की लीज पर दी गई थी। इसके बाद प्रबंधन ने करीब दो एकड़ भूमि पंजाब नेशनल इंडिया को पट्टे पर दे दी। यही नहीं वर्ष 2004 में 1393.88 वर्गमीटर भूमि दीपक भार्गव के नाम तथा 2006 में 1486.64 वर्गमीटर प्रवीण भार्गव के नाम दे दी गई। इसके साथ 1043.10 वर्गमीटर भूमि फिर प्रवीण भार्गव के नाम दर्ज कर फ्री होल्ड करा दिया गया। जांच के दौरान टीम को जमीन पर शादी-विवाह का पार्टी लॉन, हाॅल, 6-7 कमरे, रसोई, गार्ड रूम और सामुदायिक शौचालय सहित कई निर्माण मिले। भूमि का उपयोग लीज के उद्देश्य से पूरी तरह अलग करते हुए मिला। प्रबंधन ने बताया कि शादी-विवाह से होने वाली आय ट्रस्ट के माध्यम से अनाथ, बेसहारा और दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई, इलाज और दवाइयों पर खर्च की जाती है। ट्रस्ट प्रबंधन ने दावा है कि संपत्ति पंजाब नेशनल बैंक से बैनामा के जरिये खरीदी गई है। लीज की अवधि समाप्त होने के बाद न तो उसका नवीनीकरण कराया गया और न ही पट्टावधि बढ़ाई गई। इसके बावजूद भूमि का उपयोग जारी रहा। इसलिए टीम ने रिपोर्ट में फ्रीहोल्ड हिस्से को छोड़कर शेष पूरी नजूल भूमि को फिर से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की संस्तुति की है।
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नजूल की जमीन पर लीज की अवधि समाप्त होने के बाद न तो उसका नवीनीकरण कराया गया और न ही पट्टा अवधि बढ़ाई गई। इसके बावजूद भूमि का उपयोग जारी था। भूमि को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने के निर्देश दिए गए। अब केडीए कब्जा लेगा। - डॉॅ. विवेक चतुर्वेदी, एडीएम वित्त