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Kanpur News: हर बार प्रार्थना पत्र देने पर लग रहा पांच हजार रुपये शुल्क

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कानपुर। भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के पदाधिकारियों ने सोमवार को एसजीएसटी के अपर आयुक्त ग्रेड एक सैमुअल पाल एन से भेंटकर ज्ञापन सौंपा। इसमें जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील दायर करने पर आ रही परेशानियां बताईं गई। बताया गया कि निर्धारित 5,000 से 25,000 रुपये तक की कोर्ट फीस के अलावा प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने पर हर बार पांच हजार रुपये शुल्क लिया जा रहा है। अपर आयुक्त ग्रेड एक ने जीएसटी काउंसिल को ज्ञापन भेजने का आश्वासन दिया।
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प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद से अपील से संबंधित असंख्य प्रकरण लंबित हैं। इस कारण कानपुर समेत देशभर के लाखों व्यापारियों की करोड़ों की धनराशि फंसी हुई है। इन सभी मामलों का निपटारा जीएसटी ट्रिब्यूनल (अधिकरण) के माध्यम से किया जाना है। वर्तमान में जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है लेकिन ट्रिब्यूनल में अपील करने के लिए अत्यधिक शुल्क निर्धारित किए गए हैं। अपीलीय प्रक्रियाओं में इस प्रकार की भारी-भरकम फीस का कोई प्रावधान नहीं है। जीएसटी ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल करने से लेकर हर प्रार्थना पत्र को हिंदी के बजाय अंग्रेजी में देना होगा और जो पूर्व में दिए हुए आदेश हिंदी में उन्हें तो उन्हें भी अंग्रेजी में रूपांतरित करा करके ही दाखिल करना होगा। यह व्यवस्था हिंदी में होनी चाहिए। प्रवीण दीक्षित कुंदन शर्मा ने स्टेट जीएसटी कार्यालय से वर्ष 2008 में वैट के लागू होने वाले वर्ष में बकाया धनराशि जमा होने के बावजूद नोटिस भेजने का मामला उठाया। इस मौके पर मनीष गुप्ता सलोने, रोशन गुप्ता, संजय सिंह भदौरिया, शशांक दीक्षित, विजय गुप्ता, आशीष मिश्र, केके गुप्ता, जितेंद्र सिंह, इखलाक मिर्जा, अब्दुल वहीद, अनुराग जायसवाल,मनोज विश्वकर्मा, अरविंद गुप्ता, अजय यादव, अतरुद्दीन, शिव विश्वकर्मा, हिमांशु बाजपेई आदि थे।
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