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Kanpur News: श्रमिक कॉलोनियों पर जल्द आ सकता फैसला

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- अध्ययन कमेटी की रिपोर्ट जल्द शासन को भेजी जाएगी, शहर में हैं 18035 श्रमिक क्वार्टर
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- दिल्ली, ओडिशा की तर्ज पर मूल लागत पर सालों पहले हाईकोर्ट ने दिया था आदेश

माई सिटी रिपोर्टर
कानपुर। शहर की श्रमिक कॉलोनियों के मालिकाना हक पर जल्द निर्णय आ सकता है। शासन स्तर से गठित परामर्शदात्री समिति की अध्ययन कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को भेजेगी।

शहर में 18035 श्रमिक क्वार्टर हैं, जिनमें हजारों लोग रहते हैं। औद्योगिक श्रमिकों के लिए 1951 में उत्तर प्रदेश, दिल्ली और ओडिशा में ये कॉलोनियां बनाई गई थीं। सबसे पहले कानपुर में ही इनका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। हाईकोर्ट ने सालों पहले दिल्ली और ओडिशा की तर्ज पर मूल लागत पर स्वामित्व देने का फैसला किया था। सांसद रमेश अवस्थी ने केंद्रीय श्रम मंत्री को इस संबंध में कार्ययोजना बनाने के लिए पत्र भेजा है। अपर श्रमायुक्त शमीम अख्तर ने बताया कि समिति के निर्देश पर दिल्ली और ओडिशा में अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जल्द ही शासन और समिति को भेजी जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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मूल लागत पर मालिकाना हक
उत्तर प्रदेश श्रमिक बस्ती महासंघ के अध्यक्ष शैलेंद्र दीक्षित ने बताया कि 1997-98 में हाईकोर्ट ने मूल लागत पर मालिकाना हक देने का स्टे दिया था। तब कॉलोनियों की लागत 8-15 हजार रुपये के बीच आंकी गई थी। दिल्ली सरकार ने मूल लागत पर स्वामित्व दिया, जबकि ओडिशा सरकार ने इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया था। पांच प्रकार के श्रमिक इन क्वार्टरों में रहने के लिए पात्र थे।
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