कानपुर देहात। भोगनीपुर तहसील के चपरघटा में 1320 मेगावाट के पावर प्लांट लगाने के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के घोटाले की एसआईटी ने जांच शुरू की है। एसआईटी ने तहसील से राजस्व अभिलेख, बैंक से कंपनियों को दिए गए ऋण, बंधक बनाई गई जमीन आदि का ब्योरा मांगा है। टीम इन अभिलेखों से घोटाले बाजों की कुंडली खंगालेगी।
एसआईटी टीम ने बुधवार को चपरघटा के पास अधिग्रहीत की गई जमीन देखी थी। यहां पर कुछ किसानों से जमीन के अधिग्रहण से लेकर जमीन के एवज मिले रुपयों के बारे में जानकारी जुटाई थी। अब जांच टीम घोटाले की तह तक जाने के लिए बैंक व राजस्व विभाग के अभिलेख खंगालने में जुटी है। एसआईटी ने जमीन से जुड़े सारे दस्तावेज तहसील प्रशासन से मांगे हैं। वहीं जमीन के बैंक में बंधक बनाने, ऋण लेने व नीलामी प्रक्रिया से संबंधित अभिलेख पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और आईडीबीआई बैंक शाखा से मांगे गए हैं। अभिलेखों के आधार पर ही टीम कड़ी से कड़ी मिलाकर घोटाले का पर्दाफाश करेगी।
बता दें कि भोगनीपुर तहसील के चपरघटा में 1320 मेगावाट के लगने वाले पॉवर प्लांट के नाम पर 400 करोड़ की गड़बड़ी सामने आने के बाद तहसीलदार भोगनीपुर प्रिया सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इधर मामले में की जांच के लिए एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने पांच सदस्यीय एसआईटी टीम में गठित की है। इसमें भोगनीपुर थानाध्यक्ष सतीश सिंह, साइबर सेल प्रभारी अब्दुल कलाम, अपराध शाखा प्रभारी अखिलेश जायसवाल, उप निरीक्षक थाना मूसानगर चरन सिंह व एक सिपाही शामिल हैं। अब यह टीम गड़बड़ी किस स्तर पर हुई इसका पता लगा रही है। एसआईटी टीम प्रभारी सतीश सिंह ने बताया कि अभिलेखों के आधार पर बारीकी से जांच की जा रही है, तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
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यह है पूरा मामला...
भोगनीपुर तहसील के चपरघटा में 1320 मेगावाट क्षमता पावर प्लांट लगना था। इस परियोजना की स्थापना के लिए वर्ष 2010 में जमीन देने के लिए प्रक्रिया शुरू हुई। परियोजना की स्थापना के लिए ग्राम अमिलिया, सिहारी, कछगांव व चपरघटा की जमीन वर्ष 2011 में हिमावत पावर प्राइवेट लिमिटेड को शर्तों के तहत दी गई।
वहीं, ग्राम कृपालपुर, चपरघटा, रसूलपुर भुरण्डा व भरतौली में लैंको अनपरा पावर लिमिटेड को शर्तों के तहत भूमि का अधिग्रहण कराया गया। इस तरह सात गांव की अलग-अलग गाटा, रकबा की कुल 2332 एकड़ जमीन 30 साल के लिए दी गई। जमीन दिए जाने के समय ही तय हो गया था कि दोनों कंपनियां तीन साल में प्लांट की स्थापना कर बिजली उत्पादन करेंगीं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सरकारी, अधिग्रहीत भूमि आज भी खाली पड़ी है। इधर कंपनियों ने भू अध्याप्ति कार्यालय की मिली भगत से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर खतौनी में नाम दर्ज करा जमीन को बैंक में बंधक करा करोड़ों रुपये का ऋण लेकर गायब हो गईं। जमीन नीलामी से जानकारी हुई तो प्रशासन की आंख खुली।
इस मामले में 12 अप्रैल को मूसानगर थाना में तत्कालीन अपर जिलाधिकारी भू अध्याप्ति कानपुर नगर ओके सिंह, उनके विभाग के कर्मचारी, हिमावत पॉवर प्राइवेट लिमिटेड के वाइस प्रेसीडेंट एम. नरसिंह मूर्ति, लैंको अनपरा पॉवर लिमिटेड के थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट के अधिकारी, कर्मचारी निवासी उद्योग विहार फेज-3 गुरुग्राम हरियाणा, पंजाब नेशनल शाखा मंडल शस्त केंद्र गुरुग्राम, केनरा बैंक शाखा, आईडीबीआई बैंक शाखा के अधिकारी कर्मचारी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, साजिश आदि धाराओं में प्राथमिकी दर्ज है। इन पर राज्य सरकार को 300 से 400 करोड़ की क्षति पहुंचाने का आरोप है।