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Kanpur News: बोगस फर्म बनाई, गार्ड का पैन इस्तेमाल कर की गई गड़बड़ी

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माई सिटी रिपोर्टर
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कानपुर। काकादेव कोचिंग में गार्ड के रूप में काम करने वाले ओमजी शुक्ला को दिल्ली के सीजीएसटी विभाग की ओर से मिले तीन करोड़ से अधिक के टैक्स का नोटिस देने के मामले में नया खुलासा हुआ है। पता चला है कि पंजीकरण मिलने के तीन दिन बाद खुद संचालक ने फर्म बंद करवा दी। तीन करोड़ से ज्यादा की आईटीसी का दावा भी किया गया। फर्म ने केवल एक अन्य फर्म के साथ एक साल में ही 17 करोड़ से ज्यादा के कपड़ों की खरीद-फरोख्त की। माना जा रहा है कि बोगस फर्म बनाकर और पीड़ित का पैन इस्तेमाल करके गड़बड़ी की गई। उन्हें नोटिस देने से पहले विभाग ने दिल्ली स्थित फर्म के बैंक खातों की जानकारी के लिए संबंधित निजी बैंक से पत्राचार किया था।
हंसपुरम में किराए के मकान में रहने वाले ओमजी को 21 अगस्त को विभाग की ओर से नोटिस भेजा गया था जो 32 पेज का था। तीन करोड़ 14 लाख से ज्यादा का नोटिस दिया गया था। इस नोटिस से पहले उन्हें एक पेज का समन भेजा गया था। ओमजी ने बताया कि वह कभी भी दिल्ली नहीं गए। जब नोटिस आया तो कुछ समझ में नहीं आया। उनका बैंक खाता न्यूनतम बैलेंस के कारण बंद है। सैलरी मां सुषमा शुक्ला के खाते में आती थी। पैन कार्ड कभी किसी को नहीं दिया। मोबाइल नंबर लेने के लिए दुकानदार को आधार कार्ड दिया था लेकिन ये पुरानी बात है। सात महीने से वह गार्ड का काम कर रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि नोटिस की जानकारी भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्रा को दी तो उनके साथ सोमवार को सीजीएसटी कानपुर कार्यालय के कमिश्नर से मुलाकात की। कमिश्नर ने कहा था कि जहां से भी नोटिस आया है, उसका जवाब जरूर दें। अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दें और विभागीय अफसरों से जांच कराने के लिए कहें।
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एक फरवरी 2024 को मिला पंजीकरण, चार को हो गया बंद
32 पेज के नोटिस के साथ फर्म के बैंक खाता का भी जिक्र किया गया है जो नोएडा में एक निजी बैंक का है। विभाग ने जुलाई में बैंक प्रबंधन को नोटिस भेजकर फर्म के लेनदेन के ब्योरे, केवाईसी प्रक्रिया की जानकारी मांगी थी। इसमें फर्म के बारे में बताया गया कि ओम इंटर प्राइजेज का सीजीएसटीएन एक फरवरी 2024 को जारी हुआ और 4 फरवरी को स्वत: आवेदन करके पंजीकरण निरस्त करवा दिया गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 में फर्म ने एसएस ट्रेडर्स के साथ 17, 47,56,200 के अलग-अलग कपड़ों की खरीद-फरोख्त की। जिस फर्म से खरीद-फरोख्त की गई वह 16 सितंबर 2024 को बंद हो गई। इसका पंजीकरण निरस्त करने की प्रक्रिया स्वत: प्रक्रिया के तहत की गई थी। वरिष्ठ कर अधिवक्ता आशीष गुप्ता ने बताया बताया कि प्रथम दृष्टया मामला बोगस फर्म से जुड़ा हो सकता है। पूरे मामले में आईटीसी का दावा किया गया। कुछ रिटर्न भी दाखिल हुए। पंजीकरण मिलने के बाद तीन दिन में फर्म बंद कर दी गई। जिस फर्म के साथ खरीद-फरोख्त की गई वह भी बंद हो गई। विभाग ने अपने नोटिस में फर्म के बोगस होने की भी आशंका जताई है।
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