कानपुर। न तो प्रश्न पत्र हैं और न ही सभी छात्रों के लिए उत्तर पुस्तिकाएं, फिर भी खानापूरी के लिए परिषदीय स्कूलों की परीक्षा गुरुवार से शुरू होने जा रही है। कम समय और फंड न होने से जब पेपर नहीं छप पाए तो अधिकारियों ने एक नया नुस्खा खोज निकाला। वह यह कि ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिख दिए जाएंगे। एक तरकीब और है कि ब्लैक बोर्ड को दो हिस्सों में बांट दिया जाएगा। एक हिस्से पर कक्षा तीन का प्रश्न होगा और दूसरे पर कक्षा चार का। एक ही कमरे में पहली से कक्षा पांच तक के छात्र परीक्षा देंगे। कुछ कक्षाओं में एक ही छपा हुआ प्रश्न पत्र दिया जाएगा और कक्षा में झुंड बनाए बैठे छात्र इसे हल कर लेंगे।
करोड़ों के प्रोजेक्ट सर्व शिक्षा अभियान के पास परिषदीय स्कूलों की परीक्षा करवाने के लिए फंड की इतनी कमी है कि तीन मई से होने वाली इन स्कूलोें की परीक्षा को मजाक बना दिया गया। स्कूलों ने धन अभाव का रोना रोते हुए कक्षा एक से चार और छह से सात तक की परीक्षा के प्रश्न पत्र तक नहीं छपवाए। कक्षा पांच और आठ की बोर्ड परीक्षा होेनी है, इसलिए विभाग की ओर से आए मॉडल प्रश्न पत्र की फोटो कापी करवाई गई है। इस छात्रों में बांटा जाएगा। प्राथमिक स्कूल शास्त्री नगर की शिक्षामित्र प्रीति कहती है कि संकुल संसाधन केंद्र (सीआरसी) की ओर से निर्देश दिए गए है कि कक्षा एक और दो के बीच एक प्रश्न पत्र दिया जाए। कक्षा तीन और चार के लिए ब्लैक बोर्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है।
उधर, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री मुजफ्फर हुसैन कहते हैं कि कई स्कूलों में तो समस्या जगह और शिक्षकों की है। कहीं एक कमरे का स्कूल होने के कारण एक से पांच तक के छात्र एक साथ परीक्षा देंगे तो कहीं शिक्षकों की कमी के चलते ऐसा करना होगा। वहीं, नगर शिक्षा अधिकारी नरेंद्र सिंह पवार का कहना है कि नियमों के मुताबिक ही परीक्षा करवाई जा रही है। कुछ गलत नहीं है। जब उनसे परीक्षा में ब्लैक बार्ड ढकने के नियम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि स्कूलों में दिक्कतों के चलते ऐसा किया गया है।
नाम नहीं लिख पाई पांचवीं की छात्रा
कानपुर। आपका नाम क्या है? जवाब मिला संजना। हिंदी और अंग्रेजी में अपना नाम लिख लोगी....। इस सवाल से कुछ देर चुप्पी छा गई। दोबारा पूछने पर कहा हिंदी में लिख लूंगी अंग्रेजी में नहीं। हिंदी में ही लिखो... कुछ देर सोचने के बाद छात्रा ने जो नाम लिखा वह भी गलत। फिर अन्य छात्रों से प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के बारे में पूछा गया तो क्लास में सन्नाटा छा गया। सालाना परीक्षा से एक दिन पहले का यह चौंकाने वाला हाल प्राथमिक विद्यालय पांडुनगर का है। गुरुवार को हिंदी की परीक्षा देने जा रही कक्षा पांच की छात्रा अंग्रेजी क्या हिंदी में अपना नाम सही नहीं लिख पाई। पांचवीं में मुहावरा और तत्सम तद्भव भी शामिल है, लेकिन शिक्षकों ने यह पढ़ाया ही नहीं है। तर्क देते हुए शिक्षिका स्वाति नेे कहा कि इतनी गहराई से छात्रों को नहीं पढ़ाया जाता है। जितना वो समझ पाते है, उतना ही पढ़ाते है। परीक्षा में एक कविता और किताबों में छपी कहानियों से संबंधित चार प्रश्न होते है और कुछ नहीं। फिर सफाई देते हुए बोली कि छात्रों को आता सब है पर सामने बोलने में घबरा जाते है। स्वाति ने बताया कि स्कूल में 25 छात्र पंजीकृत हैं, पर मात्र आठ दस छात्र ही मौजूद थे।
सात बजे से होगी परीक्षा
कक्षा एक से पांच तक की परीक्षाएं दो पालियों में होगी। सुबह सात से 9 और 9.30 से 11.30 बजे तक होगी। 3 मई को पहली पाली में हिंदी दूसरी पाली में म्यूजिक संगीत, 4 मई को सामाजिक विज्ञान और दूसरी पाली में नैतिक शिक्षा, 5 मई को गणित और दूसरी पाली कार्यानुभव, 7 मई को विज्ञान आर दूसरी पाली में पर्यावरण, 8 मई को संस्कृत और दूसरी पाली में शारीरिक शिक्षा, 9 मई को पहली पाली में अंग्रेजी की परीक्षा में होगी।
प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल
ग्रामीण क्षेत्र-1283 प्राइमरी स्कूल
शहरी क्षेत्र-335 प्राइमरी स्कूल
ग्रामीण क्षेत्र-575 जूनियर हाईस्कूल
शहरी क्षेत्र-51 जूनियर हाईस्कूल
छात्र संख्या
प्राइमरी स्कूल ग्रामीण क्षेत्र -130949
उच्च प्राइमरी स्कूल ग्रामीण क्षेत्र-41225
प्राइमरी स्कूल नगर क्षेत्र-28,000
उच्च प्राथमिक स्कूल नगर क्षेत्र-2500
सर्व शिक्षा अभियान
बजट-89 करोड़
इसमें बस्ते और ड्रेस,पाठ्य पुस्तकें, ब्रिज कोर्स, शिक्षामित्र मानदेय, स्कूल ग्रांट, स्कूल रंगाई-पुताई, टीएलएम के लिए, प्राइमरी और जूनियर के नए भवनों के लिए पैसा मांगा गया है।
मिड डे मील
कुल करीब 22 करोड़ रुपए सालाना
11 करोड़ रुपये कंवर्जन कास्ट
6 करोड़ रसोइयों का मानदेय
5 करोड़ खाद्यान्न लागत
कनवर्जन कास्ट प्राइमरी स्कूल में 3.11 रुपए और जूनियर स्कूल में 4.69 रुपए
प्राइमरी स्कूल के बच्चे को प्रतिदिन 100 ग्राम और जूनियर के बच्चे को 150 ग्राम खाद्यान्न्र
शिक्षकों की संख्या
प्राथमिक शिक्षक-1837 सहायक अध्यापक, 730 प्रधानाध्यापक ।
जूनियर शिक्षक- 1238 सहायक शिक्षक, 249 प्रधानाध्यापक।
नगर इलाके में शिक्षक
प्राथमिक शिक्षक-357 सहायक अध्यापक, 211 प्रधानाध्यापक।
जूनियर शिक्षक-30 सहायक शिक्षक, 26 प्रधानाध्यापक।
शिक्षकों के वेतन पर 63 करोड़ रु खर्च होेते है।
सात करोड़ वजीफा
प्राइमरी स्कूल के बच्चे को तीन सौ रुपए प्रतिमाह और जूनियर हाईस्कूल के बच्चे के 480 रुपए प्रतिमाह वजीफा मिलता है। इस तरह करीब सात करोड़ रुपए खर्च।
किराए के भवन शहर में चलने वाले 335 प्राइमरी स्कूलों में से 134 स्कूल किराए के भवन में चलते है। जिसमें 49 काफी जर्जर स्थिति में हैं। हरजेंदर नगर सीआरसी में चार, नौबस्ता में पांच, गोविंद नगर में आठ और शास्त्री नगर में आठ प्राइमरी स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं। इसके अलावा नवाबगंज में तीन और प्रेम नगर सीआरसी में 21 प्राइमरी स्कूल जर्जर भवनों में चल रहे हैं। किराए की मद में करीब 27,732 रु खर्च होते है।