कानपुर। विश्व बैंक की टीम ने बुधवार को शहर की सीवरेज परियोजनाओं की समीक्षा करके बिठूर सीवरेज प्रोजेक्ट के टेंडर में खामियां बताते हुए आपत्ति लगाई। डिस्ट्रिक-वन ब्रांच सीवर लाइन परियोजना को मूर्तरूप देने के लिए जल्द टेंडर डाक्युमेंट तैयार कर विश्व बैंक को भेजने के निर्देश दिए। टीम ने नगर आयुक्त से कहा कि कुछ ऐसा करें कि रिजल्ट दिखाई दे और गंगा नदी निर्मल एवं अविरल हों।
विश्व बैंक के सहयोग से शहर में 370 करोड़ रुपये लागत वाला डिस्ट्रिक-वन सीवरेज प्रोजेक्ट और बिठूर में गहरी सीवर लाइन और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने के लिए 62 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत हुई है। इन दोनों परियोजनाओं की तैयारियों का जायजा लेेने के लिए विश्व बैंक के टेक्निकल एडवाइजर समीर खेतान, प्रतिनिधि जितेंद्र शर्मा और प्रतिनिधि मोहंती शाम साढ़े चार बजे गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के दफ्तर पहुंचे। वहां इस इकाई के महाप्रबंधक मोहम्मद जुबेर अहमद, परियोजना प्रबंधक राजेश कुमार, प्रोजेक्ट मैनेजर अजय सिंह गौड़, प्रोजेक्ट मैनेजर दिनेश कुमार के साथ बैठक की। एक घंटे चल इस बैठक में ब्रांच सीवर लाइन और बिठूर सीवरेज परियोजना की तैयारियों का जायजा लिया गया। विश्व बैंक के प्रतिनिधि समीर खेतान ने कहा कि बिठूर सीवरेज प्रोजेक्ट के लिए जो टेंडर तैयार किया है, उनमें उनके मानकों के हिसाब से कुछ तकनीकी खामियां हैं, जिन्हें एक हफ्ते में पूरा करते हुए पुन: टेंडर डाक्युमेंट भेजे जाएंगे। डिस्ट्रिक-वन ब्रांच सीवर लाइन प्रोजेक्ट के टेंडर डाक्युमेंट्स भी जल्द से जल्द भेजने के निर्देश दिए।
इसके बाद विश्व बैंक की टीम नगर निगम पहुंची। वहां नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह, प्रभारी अपर नगर आयुक्त विनोद कुमार गुप्ता, अधिशाषी अभियंता पंकज भूषण और गंगा प्रदूषण नियं्त्रण इकाई के अफसरों के साथ बैठक की। इस बैठक में वर्ल्ड बैंक के प्रतिनिधियों ने कहा कि केंद्र सरकार गठन के छह महीने बीत चुके हैं। प्रदेश सरकार को भी लगभग ढाई साल हो गए हैं, पर गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए उम्मीद के अनुरूप काम नहीं हुआ। इसलिए अब कुछ ऐसा करें कि रिजल्ट दिखाई दे और गंगा नदी निर्मल एवं अविरल हो।