कानपुर। दीपावली के ठीक एक दिन पहले यूपीएसआईडीसी में एक अजीब वाकया पेश हुआ। यहां वरिष्ठ प्रबंधक अनिल वर्मा को मंगलवार के दिन लखनऊ बुलाकर औद्योगिक क्षेत्र का प्रभारी बना दिया गया। आदेश मिलने के बाद अनिल वर्मा ने विधिवत चार्ज भी ले लिया, मगर देर शाम खबर आई कि यह आदेश रद कर दिया गया है। इस घटनाक्रम से शहर ही नहीं राजधानी में भी मजे की खलबली मची रही।
मंगलवार की सुबह अनिल वर्मा को लखनऊ बुलाया गया। वहां प्रबंध निदेशक मनोज सिंह के हाथ से जारी पत्र उनको मिला। पत्र में उन्हें औद्योगिक क्षेत्र प्रभारी बनाए जाने की खुशखबरी थी। गौरतलब है कि प्रभारी को निगम के प्रदेश भर के सभी क्षेत्रीय प्रबंधक रिपोर्ट करते हैं। यही नहीं सभी औद्योगिक क्षेत्रों में होने वाले कार्य प्रभारी के माध्यम से ही प्रबंध निदेशक के पास रखे जाते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में मार्केटिंग और रिकवरी का काम भी प्रभारी के पास ही होता है। कुल मिलाकर यह पद काफी महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ मलाईदार माना जाता है। अनिल वर्मा ने आदेश मिलने के तत्काल बाद प्रभारी पद का लिखा-पढ़ी में चार्ज भी ले लिया। इस बात की खबर जैसे ही अनिल वर्मा के विरोधी गुट को मिली, उन्होंने अपने पूरे तीर एक साथ छोड़ दिए। नतीजा यह हुआ कि मामला सरकार के तमाम बड़े मंत्रियों तक पहुंच गया। इसके बाद कहीं से इस तैनाती के पक्ष में तो कहीं के इसके विरोध में पैरवी शुरू हो गई। शाम तक नतीजा यह निकला यह आदेश रद कर दिया गया। इस बारे में जब अनिल वर्मा से संपर्क साधा गया तो उन्होंने अपनी नई तैनाती के आदेश के अलावा ज्वाइनिंग लेटर की कॉपी दिखाई। मगर प्रबंध निदेशक मनोज सिंह से बात की गई तो उन्होंने आदेश जारी किए जाने की पुष्टि की, मगर यह भी बताया कि देर शाम यह आदेश रद कर दिया गया है।
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जमकर हुई गोलबंदी
कानपुर। गौरतलब है कि निगम में औद्योगिक क्षेत्र प्रभारी का पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। लंबे समय से इस पद पर तैनात केके यादव को हाईकोर्ट में गलत हलफनामा दायर करने के चलते हटाया गया था। इसके अलावा उनके विरुद्ध तमाम जांचें भी लंबित हैं। तब से यह पद खाली चल रहा था। केके यादव खुद भी इस पद पर दोबारा आने की जुगत में थे। वहीं चर्चा यह भी है कि अनिल वर्मा के धुरविरोधी मुख्य अभियंता अरुण मिश्रा ने भी इस उलटफेर में बड़ा रोल अदा किया है।