कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी ने पीएचडी के कोर्स वर्क की फीस तय कर दी है। यह कोर्स छह महीने का होगा। सामान्य, ओबीसी की फीस 25 हजार और एससी, एसटी की फीस 12500 रुपये रखी गई है। पीएचडी में रजिस्ट्रेशन और उसकी सालाना फीस फाइनेंस कमेटी को तय करनी है। कोर्स वर्क पूरा करने के बाद रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। फिर सिनाप्सिस बनाकर अप्रूव कराने और थीसिस बनाकर जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
यूनिवर्सिटी की एकेडमिक काउंसिल ने पीएचडी का रिसर्च वर्क टफ कर दिया है। कॉमन एंट्रेंस टेस्ट पास करने वाले स्टूडेंट्स को अब सीधे पीएचडी में एडमिशन नहीं मिलेगा। इन सभी को पहले छह महीने का सेमेस्टर कोर्स करना होगा। इसके लिए कक्षाएं संचालित की जाएंगी। क्वालीफाइंग एग्जाम भी होगा, जिसे पास करना जरूरी है। क्वालीफाइंग एग्जाम में दो पेपर कराए जाएंगे। ओवरआल और हर पेपर में 50 फीसदी मार्क्स हासिल करना अनिवार्य किया गया है। इसके बगैर पीएचडी में रजिस्ट्रेशन की अनुमति नहीं दी जाएगी। रजिस्ट्रार सय्यद वकार हुसैन ने बताया कि कोर्स वर्क में फेल होने वाले स्टूडेंट्स को एक और मौका दिया जाएगा। वह छह महीने तक सेमेस्टर कोर्स करके दोबारा क्वालीफाइंग एग्जाम दे सकेंगे। दूसरे एग्जाम में फेल होने के बाद मौका नहीं मिलेगा। नए सिरे से इंट्रेंस टेस्ट देकर छह महीने के कोर्स वर्क में एडमिशन लेना पड़ेगा। रजिस्ट्रार ने कहा कि कोर्स वर्क में क्लास अटेंडेंस को महत्ता दी गई है। जो स्टूडेंट्स 75 फीसदी से कम अटेंडेंस देंगे, उन्हें क्वालीफाइंग एग्जाम से वंचित किया जाएगा।
बीटेक के टीचर करा सकेंगे पीएचडी
बीटेक में आठ साल तक पढ़ाने वाले टीचर्स को पीएचडी सुपरवाइजर बनाने की हरी झंडी दी गई है। इसका एलएलबी, एमबीबीएस के टीचर्स ने विरोध किया है। उनका कहना है कि बीटेक भी यूजी प्रोग्राम की श्रेणी में आता है। जिस तरह एलएलबी की जगह एलएलएम और एमबीबीएस की जगह एमडी, एमएस में पढ़ाने का अनुभव 10 साल कर दिया गया है, उसी तरह बीटेक की जगह एमटेक में पढ़ाने का अनुभव 10 साल किया जाना चाहिए। पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में 5 साल तक पढ़ाने वाले टीचर्स को पीएचडी सुपरवाइजर बनने का मौका मिल जाएगा।