कानपुर। शहर की फील्ड गन फैक्ट्री में बनी स्वदेशी बोफोर्स तोप ‘धनुष’ देश की सीमाओं की रखवाली करेगी। इसके लिए सेना से 20 तोपों का पहला ऑर्डर फील्ड गन फैक्ट्री को मिला है। फैक्ट्री प्रबंधन के मुताबिक यह शुरुआत है। इस तरह के ऑर्डर अब लगातार आते रहेंगे। तमाम संशोधन के बाद बनाई जाने वाली इस तोप की मारक क्षमता तो बढ़ाई ही गई है। साथ ही इसे कंप्यूटराइज्ड कंट्रोल्ड बनाया गया है।
फील्ड गन फैक्ट्री मेें वर्ष 2011 में धनुष तोप का निर्माण किया गया था। इसकी डिजाइन और फायरिंग मैकेनिज्म स्वीडन से आयात की गई बोफोर्स तोप की ही तरह है पर यह उससे कहीं ज्यादा ताकतवर है। विंटर ट्रायल सफल होने के बाद बीते वर्ष पोखरण में फायरिंग ट्रायल में इसकी बैरल फट गई थी। इस पर हाईलेवल इनक्वायरी हुई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि फायरिंग में इस्तेमाल किए गए गोले एक्सपायर्ड हो चुके थे। इसी के चलते बैरल फटी। इसके बाद से इन तोपों के बल्क प्रोडक्शन की तैयारियों के संकेत मिल गए थे। अब बीते सप्ताह फील्ड गन फैक्ट्री को पहली खेप में 20 तोप बनाकर देने का ऑर्डर दिया गया है। इसकी मुख्य असेंबली फील्ड गन फैक्ट्री में बनेगी, जबकि इसे चलायमान बनाने और अन्य आवश्यक उपकरणों को बनाने में इच्छापुर मेटल एंड स्टील फैक्ट्री के अलावा जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री मदद करेंगी। इन्हें देश की सीमाओं पर तैनात किया जाएगा। फैक्ट्री प्रबंधन के मुताबिक धनुष की मांग इतनी है कि फैक्ट्री के पास अगले पंद्रह साल तक भरपूर काम होगा।
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प्रमुख संशोधन -:
- बैरल की लंबाई 155 गुणा 39 कैलिबर से बढ़ाकर 155 गुणा 45 कैलिबर की गई है, जिससे रेंज 28 किलोमीटर से बढ़कर 40 किलोमीटर हो गई है।
- ऑप्टिकल सिस्टम के फायरिंग मैकेनिज्म को बदलकर पूरा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड कर दिया गया है, जिससे फायरिंग एक्यूरेसी भी काफी बेहतर हो गई है।
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पहले चरण में 20 धनुष तोप का ऑर्डर मिला है। इसमें तमाम संशोधन किए गए हैं, जिससे यह तोप और शक्तिशाली हो गई है। इससे फैक्ट्री प्रबंधन बेहद उत्साहित है।
अब्दुल हमीद, महाप्रबंधक (फील्ड गन फैक्ट्री)