कानपुर। आईआईटी कानपुर के दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को डॉक्टर ऑफ साइंस (डीएससी) की मानद उपाधि पाने वाले इन्फोसिस के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन डॉ. एनआर नारायण मूर्ति कभी स्टूडेंट तो कभी टीचर की भूमिका में नजर आए। ब्लैक कलर का गाउन पहनकर वह स्टूडेंट्स की अगली पंक्ति में बैठे। जैसे ही आईआईटी के डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने मानद उपाधि के लिए उनका नाम पुकारा, वह झट से मंच पर जा पहुंचे। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को नमस्कार किया, फिर उन्हीं के हाथों मानद उपाधि लेकर नीचे आ गए। साथ बैठीं पत्नी को उपाधि थमाई, फिर राष्ट्रपति का अभिवादन, शुक्रिया अदा करके बैठ गए। इससे पहले राष्ट्रपति, यूपी के राज्यपाल बीएल जोशी ने नारायण मूर्ति से हाथ मिलाया और मानद उपाधि प्राप्त करने के लिए बधाई दी। उन्हें युवा इंजीनियरों का रोल मॉडल भी बताया।
आईआईटी कानपुर से एमटेक करने के बाद विश्व की श्रेष्ठ आईटी कंपनी स्थापित करने वाले एनआर नारायण मूर्ति दीक्षांत समारोह के आकर्षण का केंद्र रहे। राष्ट्रपति के जाने के बाद उन्होंने अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट स्टूडेंट्स से सीधा संवाद किया। कहा कि आईआईटी से पढ़ाई करने के बाद जॉब के पीछे न भागें। उद्यमिता अपनाएं और जॉब क्रिएटर बनें। यह देश, समाज के हित में है। इससे बेरोजगारी दूर होगी। अच्छी टीम बनाएं और आइडिया डेवलप करें। अब मनी, मार्केट की कमी नहीं है। टीम वर्क से ही ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है। यह काम कोई अकेला व्यक्ति नहीं कर सकता है। डॉ. मूर्ति ने युवा इंजीनियर, विज्ञानियों को साइंटिफिक-इंजीनियरिंग स्किल के बेहतर इस्तेमाल की सीख भी दी। कहा कि जो करें, उससे देश और समाज का हित जुड़ा होना चाहिए। आईआईटी से पढ़कर निकलने वाले हर स्टूडेंट्स से देश, समाज को तमाम अपेक्षाएं रहती हैं। इसलिए आईआईटियंस को लीडर की भूमिका निभानी चाहिए। इन्फोसिस के मुखिया ने कहा कि जो भी करें, उसमें कान्फिडेंस झलकना चाहिए। इसके बगैर सफलता मिल पाना संभव नहीं है। कड़ी मेहनत, लगन भी जरूरी होती है। युवा इंजीनियरों को चाहिए कि वह किसी भी समस्या का समाधान ढूंढें। उसे मुश्किल बताकर टाल मटोल न करें।