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होजरी इंडस्ट्री को राहत बाकी को आफत

Fri, 01 Mar 2013 05:30 AM IST
Kanpur
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कानपुर। चिदंबरम के बजट से कानपुर का औद्योगिक समूह निराश है। हां, मृतप्राय हो रहे होजरी उद्योग को फिरसे उठ खड़ा होने की संजीवनी शक्ति जरूर मिली है। लेदर इंडस्ट्री भी छली ही गई है। हकीकत तो यह है कि उन्हें जो रियायतें देने की बात बजट में कही गई है वह कोई नई नहीं है। इसी तरह जिस बुंदेलखंड की धरती पर किसानों की आत्महत्या के आंकड़े साल दर साल बढ़ रहे हैं उनके लिए भी यह बजट बांझ ही रहा। अलबत्ता कर्ज का दायरा बढ़ाकर मानों यह संदेश दिया गया है कि ‘कर्ज लो और मरो’। खेती के लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने और इस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति देखते हुए अलग से कार्ययोजना तैयार करने का कोई संकेत न मिलने से इस बजट ने किसानों की हताशा और बढ़ा दी है। इसी तरह से आयकर का दायरा न बढ़ने से नौकरीपेशा लोगों को भी बजट से तगड़ा झटका लगा है।
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आइए कानपुर के औद्योगिक परिदृश्य पर नजर डालें और देखें कि इस बजट में उसके साथ कितना न्याय किया गया है। कभी कानपुर को पूरब का मैनचेस्टर कहा जाता था। लाल इमली, एल्गिन मिल , बीआईआसी, स्वदेशी कॉटन जैसी कंपनियों से यहां की वैश्विक औद्योगिक क्षितिज पर अलहदा पहचान थी। आज ये चारों कंपनियां बंद हो चुकी हैं। बजट में इन्हें चलाने के बारे में जिक्र तक न होने से यहां के लेगों को एक बार फिर तगड़ा झटका लगा है।
मौजूदा समय में यहां लघु, मध्यम और बड़ी मिलाकर 15000 औद्योगिक इकाइयां हैं। इनका सालाना ‘टर्नओवर’ 25000 करोड़ के आसपास है। इनसे कोई 1200 करोड़ का एक्साइज टैक्स और 1000 करोड़ रुपये वैट (वैल्यू ऐडेड टैक्स) के रूप में केंद्र और राज्य सरकार को राजस्व मिलता है। यानी सिर्फ कानपुर के उद्यमी 2200 करोड़ का राजस्व देते हैं। इसकी तुलना में बजट से इन्हें मिलने वाली सहूलियतें न के बराबर हैं।
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अलबत्ता होजरी उद्योग को मिली रियायतों से उनमें प्राण का संचार हुआ है। अकेले कानपुर के होजरी उद्योग का टर्नओवर 500 से 600 करोड़ सालाना है। पर पिछले दिनों आयात कर (इंपोर्ट ड्यूटी) खत्म होने के कारण सार्क देशों का माल यहां पट गया और यहां के होजरी उद्योग दम तोड़ने लगे। ऐसे में इस बजट में होजरी पर 12.37 फीसदी की एक्साइज ड्यूटी खत्म करने की घोषणा से यहां के होजरी कारोबारी उत्साहित हैं। इसके लिए इन उद्यमियों ने लंबी लड़ाई लड़ी थी। आंदोलन किए और जेल भी गए। अपने संघर्षों का सार्थक नतीजा पाकर वे खुश हैं।
इसके अलावा कानपुर चमड़ा उद्योग के लिए विश्व में जाना जाता है। पिछले दिनों यहां के चमड़ा उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त पहचान बनी। पर चिदंबरम की पोटली में इनके लिए कुछ न होने से यहां के 450 टेनरी (चमड़ा उद्योग) उद्यमी निराश हैं। हालांकि सीमा शुल्क 7.50 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी कर दिया गया है लेकिन उद्यमियों का मानना है कि इससे आयात को ज्यादा फायदा होने की संभावना नहीं है, निर्यात में फायदा जरूर होगा। असली लाभ तो विदेशी चमड़ा उत्पादों को मिलेगा। कृषि क्षेत्र की बात की जाय तो पूरे देश के किसानों में बजट को लेकर निराशा है। कृषि विशेषज्ञों की नजर में यह बजट किसानों को मजदूर बनने के लिए प्रेरित करने वाला है। वजह कृषि के बजट से मनरेगा फंड इस बार ज्यादा रखा गया है। अगर मध्यांचल के किसानों के लिहाज से देखें तो बजट में और नाउम्मीदी है। बता दें कि यह ऐसा क्षेत्र है जहां किसानों की आत्महत्या दर काफी अधिक है। इस क्षेत्र के लिए ऐसी कार्ययोजना बनाने की दरकार है जो सिर्फ यहां की भौगोलिक स्थिति जलवायु को ध्यान में रखकर बनाई जाय पर ऐसा कुछ नहीं किया गया। सिर्फ कर्ज लेकर खेती करने का फार्मूला न कसानों के गले उतर रहा है न कृषि विशेषज्ञों के। समाजशास्त्रियों ने इसे कर्ज के फांस में बांधने वाला बजट करार दिया है। दूसरी ओर राजनीति विज्ञानियों ने इसे ठंडा बजट कहकर नकारा है तो अर्थशास्त्रियों ने मंहगाई बढ़ाने वाला बजट बताकर निराशा व्यक्त की है। अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि यह आम आदमी नहीं अमीरों का बजट है।
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कानपुर के उद्यमियों का योगदान
फैक्ट पाइल :
15000 औद्योगिक इकाइयां
25000 करोड़ टर्नओवर
1000 करोड़ वैट अदायगी
1200 करोड़ एक्साइज ड्यूटी

इन बंद मिलों के नहीं बहुरे दिन
लाल इमली
एल्गिन मिल
बीआईसी
स्वदेशी कॉटन

ये मांगें भी नहीं पूरी हुईं
गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) जिससे पूरे देश में एक समान टैक्स व्यवस्था हो और रेट को लेकर एकरूपता की स्थिति बने।
एक्साइज लिमिट को 1.5 करोड़ से बढ़ाकर 4 करोड़ रुपये की मांग ठुकराई
श्रमिकों से जुड़े कानून में नरमी बरतने और 50 श्रमिकों तक इंडस्ट्री पर कोई नियम लागू न होने का मामला
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों के लिए क्लस्टर बनाना
छोटी और मझोली इकाइयों को सस्ती दरों पर लोन
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