कानपुर। रेल बजट में आरक्षण सरचार्ज, टिकट निरस्तीकरण और तत्काल आरक्षण शुल्क में बढ़ोत्तरीे का फैसला तो हो गया पर अभी भी विश्वस्तरीय स्टेशन का दर्जा पाने वाले सेंट्रल स्टेशन पर न तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं और न ही खान-पान स्टालों पर मानक पूरे दिखते हैं। खुले में पूड़ी-सब्जी रखी रहती है। प्रतीक्षालयों का बुरा हाल है। उच्च श्रेणी प्रतीक्षालय का एसी फेल तो वीआईपी रेस्ट रूम बंद पड़ा है क्योंकि उसका सुंदरीकरण हो रहा है। ‘अमर उजाला’ टीम ने बुधवार को सेंट्रल स्टेशन के कुछ प्वाइंटों पर जाकर यात्री सुविधाओं का आकलन किया तो हकीकत दावों से विपरीत दिखी।
सीन एक समय-शाम 4 बजे। स्थान-प्लेटफार्म नंबर एक।
आरपीएफ थाने के ठीक बगल में बने उच्च श्रेणी वेटिंग हाल में लगा एसी बंद था। सामने के टॉयलेट का दरवाजा खुला होने और सफाई न होने से बदबू बाहर तक आ रही थी। कई यात्रियों ने स्टेशन अधीक्षक मेवालाल के पास जाकर शिकायत की। जवाब मिला कि एसी की जरूरत हो तो चलवा दें। यात्री ने कहा कि गर्मी लग रही है तो चलवाइए, पता चला कि एसी सिस्टम ही खराब पड़ा है।
सीन-दो- स्थान- कैंट साइड पोर्टिको। समय-शाम 4:15 बजे।
सुरक्षा व्यवस्था का अंदाजा इसी से लगता है कि दोनों गेटों पर चेकिंग बाबू नहीं थे। यात्री वाहनों से उतरते ही सीधे प्लेटफार्म पर पहुंच रहा था। जबकि स्टेशन पर हाई अलर्ट है। सीआईएसएफ की एक बटालियन को गश्त के लिए लगा रखा गया है। जीआरपी थाने के बाहर प्लेटफार्म पर बने बंकर में भी सन्नाटा पसरा था। संतरी का अता-पता नहीं था। सीसीटीवी मेज पर रखा धूल खा रहा था।
सीन-तीन-स्थान- सिटी साइड। समय-शाम-4:45 बजे।
पोर्टिको हाल में बनी इन्क्वायरी खिड़की पर यात्रियों की लाइन लगी थी। खिड़की के ठीक बगल में लगा लोकेटर भी बंद था। ट्रेनों की जानकारी न मिलने पर यात्री खिड़की पर इस कदर लाइन लगाए थे कि अंदर से दी जाने वाली जानकारी को सुन भी नहीं पा रहे थे। नजारा देख बाबू भी वहां से खिसक गया।
सीन-चार- स्थान- प्लेटफार्म नंबर चार। समय- शाम 4:30 बजे।
दिल्ली साइड पुल से उतरने के बाद पचास कदम आगे बने खानपान स्टाल पर समोसे और छोले भगोने में रखे थे। पर न तो समोसे के ऊपर कोई जालीदार ढक्कन था और न ही छोले के भगोने पर ढक्कन। मक्खियां भिनक रही थी। रेट लिस्ट का बोर्ड उल्टा टंगा था।
बयान
रेल यात्रियों की हर सुविधा पर गौर रखा जाता है। इतने बड़े नेटवर्क में कोई न कोई चूक होती ही है पर शिकायत मिलने पर जांच और दोष साबित होने पर कार्रवाई होती है।
संदीप माथुर, सीपीआरओ-एनसीआर