कानपुर। ‘भइया, ...ये ट्रेन कब आएगी?’, ‘ अच्छा ये ही बता दीजिए कि क्या किसी दूसरी ट्रेन से जा सकते हैं?’ जवाब न मिलने पर (झल्लाकर) ‘अरे कोई तो बताए कि ये ट्रेन कब आएगी?’ घर लौटने की आस में ट्रेनों का इंतजार कर रहे परेशान यात्रियों की ये झल्लाहट मंगलवार को सेंट्रल के पूछताछ काउंटरों पर नजर आई। दरअसल, ट्रेनों का टाइम शेड्यूल गड़बड़ाने के कारण यात्रियों को ट्रेन के आने और जाने के सही वक्त की जानकारी नहीं मिल सकी। ट्रेनों के इंतजार में कई यात्रियों ने सोमवार की रात प्लेटफार्म पर ही बिताई। वहीं, इलाहाबाद से आ रहीं ट्रेनें ठसाठस होने के कारण कई यात्री उन ट्रेनों से जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। स्पेशल ट्रेनों के चक्कर में दो अन्य ट्रेनें निरस्त रहीं। स्टेशन में भीड़ देख वेंडरों ने भी खानपान के मनमाने दाम वसूले। उधर, ट्रेनों का संचालन बुधवार को भी सामान्य होने की उम्मीद नहीं है।
10 फरवरी को मौनी अमावस्या पर कुंभ स्नान के लिए गए तीन करोड़ से भी ज्यादा लोगों में से अभी भी 50 लाख से ज्यादा लोग इलाहाबाद में डेरा डाले हैं, उन्हें लौटने के लिए ट्रेनें नहीं मिल रही हैं। जो ट्रेनें वहां से आ रही हैं, वे चंद मिनटों में ही ठसाठस भर जाती हैं, उनमें खड़े होने की भी जगह नहीं रहती, जबकि दरवाजों पर लटकी सवारियों को जीआरपी बाहर खींच लेती है। लगातार तीसरे दिन मंगलवार को जो भी ट्रेनें इलाहाबाद से आईं, उनके जनरल कोचों में तो खड़े होने की जगह नहीं थी। जनरल टिकट पर हजारों यात्री आरक्षित कोचों से भी आए।
सेंट्रल स्टेशन में हजारों यात्री घर लौटने के लिए सोमवार से ही ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं। वेटिंग रूम फुल होने की वजह से वे प्लेटफार्मों पर ही रात काटने को मजबूर हैं। इन यात्रियों ने स्टेशन के पूछताछ केंद्रों से भी ट्रेनों की सही जानकारी न मिल पाने पर रोष जताया। दूसरी तरफ इलाहाबाद स्टेशन हादसे के बाद वहां जाने वाले यात्रियों की तादात लगातार दूसरे दिन कम रही। दिन में इलाहाबाद जाने के लिए बिना पूर्व सूचना के दिन में 3 बजे लगाई गई माघ मेला स्टेशन 4:40 बजे रवाना हुई। रास्ते में बिंदकी, करबिगवां, फतेहपुर, मलवा, खागा, भरवारी में स्टापेज दिए जाने के बावजूद इस ट्रेन से बहुत कम यात्री गए, हालांकि इससे दैनिक यात्रियों को राहत मिली। इलाहाबाद के लिए लगाई गई स्पेशल ट्रेनों की वजह से लगातार दूसरे दिन आगरा इंटरसिटी और झांसी पैसेंजर निरस्त रही। जबकि महानंदा, रीवा, वरुणा, सीमांचल, पुरुषोत्तम, मुरी समेत दर्जनों ट्रेनों लेट रहीं।
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इनसेट
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खत्म हो गए पैसे, भूख मिटाएंगे कैसे!
सेंट्रल पर राजस्थान के कोटा जिले के ग्राम सुल्तानपुर निवासी मुरारी लाल, बद्रीलाल, सीताबाई आदि ने बताया कि वे 7 फरवरी को गांव से संगम में डुबकी लगाने गए थे। 10 तारीख को स्नान करने के बाद देर शाम वे इलाहाबाद रेलवे स्टेशन जाने लगे तो पर पुलिस ने उन्हें मेला स्थल से बाहर नहीं निकलने दिया। बाद में हादसे का पता चला तो स्टेशन जाने की हिम्मत नहीं पड़ी पर घर लौटना था। इसलिए मंगलवार को हिम्मत कर इलाहाबाद स्टेशन पहुंचे। वहां लाखों की भीड़ थी। स्टेशन में जोधपुर - हावड़ा के इंतजार के दौरान पुलिस ने कहा कि कानपुर जाकर यह ट्रेन पकड़ें। इसके बाद वे कानपुर आए। इतने पैसे थे कि यहां से भरतपुर का टिकट ले लिया, पर पैसे कम पड़ने की वजह से सुबह से भूखे हैं, पर यहां भी ट्रेन नहीं मिल रही। इसी तरह अहमदाबाद (गुजरात) के भरत पटेल ने बताया कि उन्हें ओखा एक्सप्रेस से लौटना था, पर इलाहाबाद में भीड़ की वजह से यह ट्रेन छूट गई। इलाहाबाद स्टेशन में रुकने नहीं दिया गया। बस से कानपुर आए। अब यहां से जो भी ट्रेन मिलेगी, उसी से चले जाएंगे।