कोरोना के चलते लॉकडाउन में शहर काजियों के दारुल कजा और मुफ्तियों की दारुल इफ्ताओं में पारिवारिक कलह के मसले 98 फीसदी घट गए हैं। लॉकडाउन के कारण दारुल इफ्ताओं से लिखित फतवे जारी नहीं किए जा रहे हैं। इमरजेंसी मसले आने पर फोन से जवाब दिए जा रहे हैं।
लोगों को शरीअत के प्रावधान बताकर लिखित जवाब लॉकडाउन के बाद दिए जाएंगे। शहर काजियों केे दारुल कजा और दारुल इफ्ता में लॉकडाउन की वजह से आने-जाने की पाबंदी है। इस वजह से मसले कम हो गए हैं। खासतौर पर पारिवारिक कलह के मसलों की गिरावट का ग्राफ शून्य के नजदीक पहुंच रहा है।
करीब दो फीसदी जो मसले आ भी रहे हैं, वे खास नहीं हैं। पारिवारिक कलह के इन मसलों के साथ बीमारी और अन्य दूसरी वजहें जुड़ी रह रही हैं। मदरसा अहसुन मदारिस कदीम, नई सड़क के प्रभारी मुफ्ती मो. हनीफ बरकाती का कहना है कि दारुल इफ्ता में बहुत कम मसले आ रहे हैं। इसी तरह दारुल कजा बांसमंडी के मुफ्ती साकिब अदीब ने कहा कि इमरजेंसी मसलों में फोन पर हो रही है। और बाद में आकर लिखित में फतवा लेने को कहा जा रहा है। यही हाल अन्य दारुल इफ्ताओं का भी है।