उन्नाव/परियर। कुछ दिनों से लगातार रुक - रुककर हो रही बारिश और नरौरा से पानी छोड़े जाने से गंगा नदी के जलस्तर में खासा इजाफा हो गया है। अब पानी इतना बढ़ गया है कि सदर तहसील क्षेत्र के कटरी इलाके के आधा सैकड़ा गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। खेतों में पानी भर जाने से फसल बर्बाद हो गई है व पशुपालकों के सामने पशुओं के चारे की भी समस्या पैदा हो गई है। ग्रामीण दिन रात जलस्तर पर नजर रख रहे हैं।
मंगलवार दोपहर दो बजे तक जलस्तर 111.610 मीटर रिकार्ड किया गया। जो चेतावनी बिंदु 112 मीटर से महज .390 मीटर ही दूर है। जानकारों की मानें तो .2 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहे जलस्तर के बाद परियर क्षेत्र के कई गांवों के पास पानी पहुंच गया है।
जिन गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है उनमें गंगादीनपुरवा, पनपथा, ललतूपुरवा, वंदनपुरवा, देवीपुरवा, मानाबंगला, चंडीबंगला, बाबूबंगला, टेपरा, महानंदपुरवा, कोलवा, जूड़ापुरवा, पतियारा, अतरी, रामपुर, कटरी बर्धना, रौतापुर, फ तेपुर, सिद्धन, कनवापुर, लेगड़पुर, बेनिपुरवा, मक्कापुरवा, बहरौला, मरौंदा सहित लगभग आधा सैकड़ा गांव शामिल हैं। इन गांवों के खेतों में पानी भर जाने से बोई गई फसल बर्बाद हो गई हैं।
पशुपालकों के सामने पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। ग्रामीणों में राजकुमार, इंदल, प्रकाश, सोहन व सुंदर निषाद आदि ने बताया वह लोग दिन-रात बढ़ते जलस्तर पर नजर रख रहे हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि अगले एक-दो दिन में जलस्तर चेतावनी बिंदु पार कर सकता है।
प्रशासन अंजान, नहीं पहुंचे अधिकारी
परियर क्षेत्र में गांवों के नजदीक पानी पहुंच जाने के बाद भी जिला प्रशासन अभी इससे अंजान बना है। बाढ़ की आशंका के कारण ग्रामीणों की सांसे अटकी हुई हैं, लेकिन अधिकारी क्षेत्र में झांकने तक नहीं पहुंचे हैं। उसने ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं। इस संबंध में राजस्व निरीक्षक विजय शंकर अवस्थी ने बताया कि अभी नाव व अन्य किसी प्रकार की सुविधा के लिए कोई निर्देश उच्चधिकारियों से नहीं मिले हैं।
84 किमी लंबाई में फैला है कटरी
उन्नाव। जिले में 84 किलोमीटर लंबाई में फैला गंगा कटरी क्षेत्र लगभग हर साल बाढ़ से प्रभावित होता है। अक्तूबर 2010 और सितंबर 2011 में आई बाढ़ में बांगरमऊ, गंजमुरादाबाद, सफीपुर, सिकंदरपुर सरोसी और बीघापुर ब्लाकों में फैले कटरी क्षेत्र के 300 गांव प्रभावित हुए थे। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री और सहायता पहुंचाने के लिए वर्ष 2010 में सेना की मदद लेनी पड़ी थी जबकि वर्ष 2011 मेें पीएसी को तैनात किया गया था।
ये गांव होते हैं प्रभावित
बांगरमऊ ब्लॉक में कटरी गदनपुर, आहार, अहिरन पुरवा, जगन्नगर, मेलारामकुंवर, अँटवा, जमुनिहा बंगर सहित करीब दो दर्जन गांव हैं। गंजमुरादाबाद ब्लॉक में भिखारीपुर पतासिया, सिरधरपुर, आलमऊ सराय, दानापुर, दरियापुर, खैरहन, देवखरी, चोरहा, कुशराजपुर सहित दो दर्जन गांव हैं। फतेहपुर चौरासी ब्लॉक में जाजामऊ, जाजामऊ एहतमाली, जाजामऊ गैर एहतमाली, दबौली, गड़ाई, खग्गापुरवा, धन्नापुरवा, अवधिनखेड़ा, इस्माइलपुर, नौगवां, कटरी, तोरणा सहित आधा सैकड़ा गांव हैं। सफीपुर ब्लॉक में अल्लीपुर, शेरपुर, रायपुर, सहित एक दर्जन से अधिक गांव और सदर तहसील में पनपथा, गंगादीनखेड़ा, ललतूपुरवा, बंदनपुरवा, देबीपुरवा, माना बंग्ला, बाबू बंग्ला, चंदी बंग्ला, कुलवा, बेनी पुरवा, महानंद पुरवा, पेपरा सहित तीन दर्जन गांव हैं। बीघापुर तहसील बक्सर, पाटन आदि क्षेत्रों में करीब एक सैकड़ा गांव।
अभी खतरे का निशान दूर
नरौरा से पानी छोड़े जाने के कारण गंगा के जलस्तर में कुछ बढ़ोत्तरी हुई, लेकिन अभी खतरे का निशान खासा दूर है। फिर भी कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया गया है। उनसे स्थितियों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है। -बीएन यादव, अपर जिलाधिकारी
-चेतावनी बिंदु के नजदीक पहुंचा गंगा नदी का जलस्तर
-ग्रामीणों में दहशत, फसल बर्बाद, पशुओं के चारे की समस्या
अमर उजाला ब्यूरो