हसनगंज। प्रसव के बाद नवजात की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए। डाक्टर की लापरवाही के साथ-साथ स्टाफ नर्स व आया पर चढ़ावा न चढ़ाने से नवजात को हाथ तक नहीं लगाया। इस दौरान लगभग डेढ़ घंटे तक नवजात का इलाज नहीं हो सका। परिजनों के काफी मिन्नत करने व चढ़ावा चढ़ाने के बाद आया ने बच्चे को हाथ लगाया। बच्चे की मौत पर परिजनों ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। पीड़ित ने नर्स व आया के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी है। परिजनों का कहना था कि बड़ी मिन्नतों के बाद उन्हें लड़का हुआ था। इसके पहले दो बेटियां हैं।
हसनगंज तहसील क्षेत्र के गांव तलवा पिछवाड़ा गांव निवासी राजकुमार की पत्नी रोशनी (26) को प्रसव पीड़ा होने पर पति ने आशा रेखा शर्मा को जानकारी दी। आशा, रोशनी को एंबुलेंस से स्वास्थ्य केंद्र लेकर आ रही थी। एंबुलेंस में ही रोशनी ने बच्चे को जन्म दिया।
सुबह लगभग 9.30 बजे प्रसूता सीएचसी पहुंची। सीएचसी में डा. अखिलेश के अलावा स्टाफ नर्स मधू व आया राजवती मौजूद थीं। राजकुमार का आरोप है कि स्टाफ नर्स व आया ने एक हजार रुपये मांगे। उसने चार सौ रुपये देने के लिए कहा। इस पर आया ने हाथ लगाने से मना कर दिया। काफी मिन्नत के बाद चार सौ रुपये लिए।
नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने से आया ने उसकी नाक में नली डाली। नली पड़ते ही बच्चे को उलझन हुई और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।
सीएमओ डा. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मामला जानकारी में आया है। परिजनों ने शिकायत नहीं की है। फिर भी जांच कराई जा रही है। सीएचसी अधीक्षक डा. नितिन श्रीवास्तव ने बताया कि छह महीने में ही प्रसव वह भी घर पर हुआ था। बच्चा जब सीएचसी लाया गया तो उसके मुंह और नाक से पानी निकल रहा था। बच्चा नीला पड़ चुका था। इलाज किया गया, लेेकिन उसने दम तोड़ दिया। रुपये मांगने वाली बात गलत है। स्टाफ में किसी ने रुपये नहीं मांगे।
डा. अखिलेश ने बताया कि बच्चा अविकसित था। आरोप लगाने को कोई भी लगा सकता है। बच्चा हाथ लगाने के लायक ही नहीं था। सीएचसी जब बच्चा लाया गया तो तब ही वह मरणासन्न था।
- परिजनों का आरोप, डाक्टर ने नहीं लगाया हाथ
- मानमनौव्वल के डेढ़ घंटे बाद शुरू हुआ इलाज