अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के लोक शिक्षा केंद्रों में पुस्तकों व स्टेशनरी खरीद के लिए आई लाखों रुपये की धनराशि वापस होगी। मिशन निदेशक ने जिला समन्वयकों से उक्त धनराशि से अब तक खरीदी गई सामग्री व पुस्तकों का उपभोग प्रमाणपत्र भी मांगा है। सामग्री खरीद के लिए लोक शिक्षा केंद्र को अधिकृत किया गया था। साल भर से ज्यादा का समय बीत गया, लेकिन अभी तक सामग्री व पुस्तकें आदि नहीं खरीदी गईं।
शासन ने साक्षर भारत मिशन योजना के तहत 18 वर्ष की उम्र पार कर चुके युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों को साक्षर करने के लिए गांव-गांव लोक शिक्षा केंद्र खोले थे। गांव में प्रेरकों व ब्लाक व जिले में समन्वयकों की नियुक्ति की थी। वर्ष 2010 से शुरू इस योजना का मकसद चित्रकूटधाम मंडल में 100 फीसदी साक्षरता लाना है।
चारों जिलों में करीब 2000 लोक शिक्षा केंद्र प्राथमिक स्कूलों में संचालित हैं। साक्षरता वैकल्पिक शिक्षा निदेशक एवं सचिव राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण ने जिलाधिकारियों को निर्देश में कहा है कि लोक शिक्षा केंद्रों पर सामग्री की व्यवस्था के लिए भारत सरकार से प्राप्त धनराशि का ‘अथराइजेशन’ किया गया था। 26 सितंबर 2012 को प्रति केंद्र 2550 रुपये जारी किए गए थे। चारों जिलों के लोक शिक्षा केंद्रों में पुस्तक व लेखन सामग्री आदि खरीद के लिए करीब 55 लाख रुपये दिए गए।
सामग्री खरीद के लिए लोक शिक्षा केंद्र को अधिकृत किया गया था। निर्देश दिए गए थे कि सामग्री की व्यवस्था सरकार से निर्धारित नियमों के तहत सामान खरीदा जाए। लेकिन ज्यादातर जनपदों ने सामान नहीं खरीदा। इससे राज्य स्तर पर शेष राशि डंप है। लोक शिक्षा केंद्रों को दी गई धनराशि खर्च करने को कई बार निदेशालय स्तर से पत्र लिखे गए। फिर भी चार सालों में यह पैसा नहीं खर्च किया गया। इसके पीछे वजह बताई जा रही है कि पैसा खर्च करने में लोक शिक्षा समिति सचिव (वरिष्ठ अध्यापक), प्रधान व प्रेरक के हस्ताहर से धनराशि खाते से निकालने का प्रावधान है।
तीनों में एकराय न होने पर यह पास चार सालों से खातों में पड़ा है। निदेशक अवधेश नरेश शर्मा ने जिलाधिकारी (अध्यक्ष जिला लोक शिक्षा समिति) को भेजे पत्र में कहा है कि यदि धनराशि खर्च ली गई है तो उसका उपभोग प्रमाण पत्र तत्काल भेजवाएं। जहां धनराशि खर्च नहीं की गई है, वहां पूरी धनराशि निदेशालय को वापस की जाए।
साक्षर भारत मिशन दिसंबर माह से खत्म हो जाएगा। यह योजना पांच साल के लिए शुरू की गई थी। शासन के आंकड़ों में मंडल में अब 100 फीसदी साक्षरता है। दिसंबर माह में साक्षरता मिशन की परीक्षा होगी। इसमें मंडल के हजारों साक्षर शामिल होंगे। यह परीक्षा आखिरी मानी जा रही है। शासन स्तर से योजना बंद करने के निर्देश विभाग में आ चुके हैं।
-निदेशक ने जिलाधिकारियों को जारी किए निर्देश
-वर्ष 2012 में मिले थे मंडल को 55 लाख रुपये
-प्रौढ़ों को साक्षर करने के लिए खरीदी जानी थी सामग्री