देश-प्रदेश में प्रसिद्ध कनपुरिया होली मेला इस बार 75 साल पूरे करने जा रहा है। अबकी यह ‘अनुराधा नक्षत्र’ पर 28 मार्च को मनाया जाएगा। रंग का ठेला रज्जन बाबू पार्क से सुबह 9:30 बजे उठेगा।
यह निर्णय मंगलवार को कानपुर हटिया होली महोत्सव कमेटी ने रज्जन पार्क में बुलाई बैठक में लिया। अध्यक्षता कर रहे मूल चंद सेठ और मेला संयोजक ज्ञानेंद्र विश्नोई व विनय सिंह ने बताया कि मेले का 75वां समारोह धूमधाम से मनाने के लिए सहयोग धनराशि जमा की जा रही है। जो लोग इसमें सहयोग करना चाहते हैं वे कमेटी से मिल सकते हैं।
समारोह में होलिका दहन से लेकर मेले तक अलग अलग दिन भव्य समारोह कराने की योजना है। उधर, काकादेव, सिविल लाइंस, शारदा नगर, आर्य नगर, पनकी और श्याम नगर सहित कई क्षेत्रों में शगुन के लिए होलिका की लकड़ी रख दी गई है।
मेला कमेटी ने होलिका रखने वाले क्षेत्रीय आयोजकों से होलिका के लिए हरे भरे पेड़ न काटने और आग में प्लास्टिक न जलाने की अपील की है। बताया कि ‘होलाष्टक’ 16 मार्च से लगेंगे।
...इसलिए विशेष है कनपुरिया होली मेला
वर्ष 1941 में अंग्रेजों की गुलामी झेल रहे आजादी के कुछ दीवानों ने होली के दिन हटिया के रज्जन पार्क में तिरंगा फहराकर आजादी के नारे लगाए थे। इन्हें खुशी और होली के रंगों में सराबोर देख अंग्रेजी हुकूमत नाराज हो गई, और सभी को जेल में डाल दिया। इसके बाद शहर में आंदोलन शुरू हो गया।
शहर वासी इन लोगों की रिहाई के लिए अड़ गए। ऐसे में अंग्रेजों ने छह दिन बाद सभी को रिहा किया। जिस दिन इनकी रिहाई हुई, उस दिन अनुराधा नक्षत्र लगा था। लोगों ने खूब रंग खेला और सरसैया घाट गंगा तट पर नहाया-खाया। तभी से होली के बाद अनुराधा नक्षत्र में होली मेला (गंगा मेला) मनाने और रंग खेलने का चलन शुरू हो गया। इस दिन सरसैया घाट पर बड़ा होली मेला भी लगता है।