नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) 2016 में सामूहिक नकल करने की साजिश के तहत 72 स्टूडेंटों पर मेडिकल एग्जाम देने पर रोक लगा दी गई है। ये सभी स्टूडेंट एग्जाम के दौरान इलेक्ट्रानिक डिवाइस के साथ पकड़े गए थे जिसेक चलते इन्हें डिबार कर दिया गया।
बता दें यह रोक स्थायी है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन (सीबीएसई) की तरफ से आयोजित किसी भी मेडिकल एग्जाम में अब ये स्टूडेंट शामिल नहीं हो सकेंगे। इसमें यूपी के भी कुछ स्टूडेंट हैं। पूरी जानकारी वेबसाइट www.cbse.nic.in पर उपलब्ध करा दी गई है।
नीट 2016 से देश के सरकारी, गैर सरकारी मेडिकल कालेजों की एमबीबीएस, बीडीएस की सीटें भरी गई थीं। टेस्ट एक मई और 24 जुलाई को हुआ था। इस दौरान देश के अलग-अलग राज्यों में 72 स्टूडेंटों को ओएमआर शीट से छेड़छाड़, नकल या फिर इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस के साथ पकड़ा गया था। इसके बाद पूरा मामला सीबीएसई की बोर्ड ऑफ गवर्निंग काउंसिल के सामने रखा गया। जांच-पड़ताल भी हुई। अब स्टूडेंटों को मेडिकल एग्जाम से प्रतिबंधित करने का फैसला हुआ है। आजमगढ़ की स्नेहा सिंह ने अजमेर (राजस्थान) से पेपर दिया था लेकिन नकल के आरोप में पकड़ी गईं।
पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की थी। सीबीएसई के सूत्रों ने बताया कि मेडिकल एग्जाम में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ पहली बार इतनी बड़ी कार्रवाई हुई है। इसके लिए सीबीएसई को पांच अलग-अलग आदेश जारी करने पड़े हैं। इनके माध्यम से क्रमश: 11 , आठ, चार 46 और तीन स्टूडेंटों को एग्जाम से प्रतिबंधित किया गया। यह आदेश शैक्षिक सत्र 2017-18 से लागू होगा। नीट का आगामी पेपर भी स्टूडेंट नहीं दे सकेंगे।