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प्रबंधक के घर पर कॉपी हल करते धरा गया शिक्षक

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कानपुर देहात। एसओजी ने शुक्रवार को रायपुर कुकहट स्थित विवेकानंद इंटर कालेज के प्रबंधक के घर पर शिक्षक व चपरासी को इंटरमीडिएट भौतिक विज्ञान का पर्चा हल करते पकड़ा। उनके पास से दो उत्तर पुस्तिकाएं और नकल सामग्री बरामद की गई है। डीआईओएस की तहरीर स्कूल प्रबंधक, केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक, शिक्षक और चपरासी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने शिक्षक व चपरासी को गिरफ्तार कर लिया है, अन्य की तलाश की जा रही है। अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक को भी हटा दिया गया है।
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विवेकानंद इंटर कालेज के प्रबंधक धीरेश कुशवाहा के घर पर यूपी बोर्ड परीक्षा भौतिक विज्ञान का पेपर साल्व होने की सूचना स्वाट टीम को मिली थी। इस पर स्वाट टीम प्रभारी देवेश शुक्ला और अकबरपुर कोतवाली प्रभारी ऋषिकांत शुक्ला ने घर पर छापा मारा। वहां कालेज का शिक्षक मनोज कुमार निवासी जिगनीपुरवा गजनेर पेपर हल कर रहा था। साथ में चपरासी फूल सिंह भी मौजूद था। पुलिस को शिक्षक के पास से दो उत्तर पुस्तिका, नकल सामग्री और चपरासी के पास बहुविकल्पीय प्रश्रों के उत्तर लिखे मिले। मौके से दो मोबाइल व पांच हजार रुपये भी मिले हैं। पुलिस की सूचना पर मौके पर पहुंचे डीआईओएस ने कॉलेज में छानबीन की। उन्हें प्रश्नपत्र तो पूरे मिले लेकिन दो कॉपियां कम निकलीं। डीआईओएस अरविंद कुमार द्विवेदी की तहरीर पर कालेज के प्रबंधक धीरेश कुशवाहा, केंद्र व्यवस्थापक जितेंद्र सिंह, शिक्षक शैलेंद्र तिवारी, शिक्षक मनोज कुमार और चपरासी फूल सिंह पर नकल अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। कोतवाल ऋषिकांत शुक्ला ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है। मनोज व फूलचंद के पास से दो मोबाइल 5 हजार रुपये मिले हैं।
इधर, शिक्षक मनोज प्रबंधक के धर पर कापी में सवाल हल कर रहा था जबकि परीक्षा केंद्र से उसे मोबाइल फोन पर प्रश्न बताए जा रहे थे। परीक्षा केंद्र के अंदर मोबाइल पहुंने पर अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक, स्टेटिक मजिस्ट्रेट की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। डीआईओएस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच कराई जाएगी। इसके अलावा कालेज का पूरा स्टाफ बदल कर परीक्षा कराई जाएगी। शिक्षक मनोज ने पुलिस को बताया कि उसे दो हजार रुपये प्रति कापी के हिसाब से दिए गए थे। चपरासी फूलचंद ने कापियां उपलब्ध कराई थीं। चर्चा है कि प्रबंधक के एक रिश्तेदार कुछ चुनिंदा परीक्षार्थियों से मोटी रकम लेकर कापियां लिखाने का खेल केंद्र पर हो रहा था।
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बता दें कि बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं पर कोडिंग होती है। सीरियल नंबर से ही कक्ष में परीक्षार्थियों को कापियां दी जाती हैं, क्रमांक गलत होने पर विवरण केंद्र व्यवस्थापक के पास दर्ज होता है। कक्ष में बांटी गईं उत्तर पुस्तिकाओं का सीरियल नंबर न मिलने पर कक्ष निरीक्षकों ने आपत्ति क्यों नहीं जताई। परीक्षा केंद्र के बाहर पकड़ी दो उत्तर पुस्तिकाओं में एक पर केंद्र व्यवस्थापक की मोहर लगी थी जबकि दूसरी पुस्तिका में मोहर नहीं लगी थी और न ही उसमें सीरियल नंबर था।
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