अमर उजाला ब्यूरो
चित्रकूट। जिला विधिक सेवा दिवस पर जिला जज अतुल कुमार गुप्ता ने कहा कि मौलिक अधिकारों का हनन होेने पर व्यक्ति न्यायालय आकर अधिकार हासिल कर सकता है। अनुसूचित जाति, जनजाति, अत्याचार से पीड़ित, मानसिक रोगी, शहीद सैनिकों के आश्रित, कारागृह के बंदियों और एक लाख रुपये से कम वार्षिक आय से कम वाले गरीब परिवारों को न्याय दिलाने में यहां तक कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नि:शुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराता है।
मुख्यालय में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में गुरुवार को विधिक सेवा दिवस मनाया गया। जिला जज गुप्ता ने बताया कि नौ नवंबर 1995 को विधिक सेवा दिवस का शुभारंभ किया गया था। इसके बाद उन्होंने मौलिक अधिकारों की जानकारी दी। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी ने कहा कि विधिक साक्षरता एक मूलभूत आवश्यकता है।
इसके अभाव में गरीब जनता का शोषण होता है। विधिक जागरूकता के पवित्र उद्देश्य के साथ इस अभियान की शुरुआत की गई है। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष शक्तिकांत ने कहा कि मुकदमों को सुलह समझौते के आधार पर समाधान कराने का प्रयास करना चाहिए। अपर जिला जज पीके श्रीवास्तव, अपर जिला जज संजय कुमार ने कहा कि सुलह समझौते के आधार पर मुकदमों का निस्तारण सभी के लिए फायदेमंद रहता है। एसडीएम सत्यप्रकाश (आईएएस)ने कहा कि लोगों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए समझौता और पंचायत पुरानी पद्धति है। इस समय देश में लगभग तीन करोड़ मुकदमे लंबित हैं।
संचालन प्राधिकरण के सचिव सिविल जज मो.नसीम ने किया। इसके बाद पैरालीगल वालेंटियर और डायट के प्रशिक्षुओं की रैली को जिला जज और जिलाधिकारी ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर अपर जिला जज अनुरोध मिश्र, सिविल जज सुभाष सिंह, सीजेएम निहारिका सिंह, सिविल जज सुधा सिंह, जेएम नेहा बनौधिया व एसीजेएम आशुतोष सिंह आदि मौजूद रहे।